भावभीनी श्रद्धांजलि आधुनिक रसशास्त्र के “नागार्जुन” परम आदरणीय पद्मश्री वैद्य बालेन्दु प्रकाश जी को विनम्र श्रद्धांजलि-Newsnetra
आज हृदय अत्यंत व्यथित है। रसशास्त्र का एक युग आज मानो मौन हो गया। वैद्य बालेन्दु प्रकाश जी ने रसौषधियों के क्षेत्र में जो अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टि प्रदान की, वह केवल अतुलनीय ही नहीं, बल्कि अकल्पनीय भी है। मेरे लिए वे सदैव आधुनिक रसशास्त्र के “नागार्जुन” रहेंगे।
मैंने अनेक अवसरों पर कहा है—”वैद्य बालेन्दु प्रकाश जी जैसा न कोई था, न है, न होगा। न भूतो, न भविष्यति।”
“अमर” के माध्यम से आपने अनेकों रोगियों के जीवन को संवार दिया। आप स्वयं भी अपनी अमर औषधियों की भाँति सदैव “अमर” रहेंगे। यह मेरे लिए सौभाग्य और गर्व का विषय है कि Amar के तकनीकी विकास की यात्रा में मुझे भी आपके साथ कार्य करने का अवसर मिला।
रसशास्त्र आपके प्रति सदैव कृतज्ञ रहेगा।
आपका कोटिशः आभार, अभिनंदन एवं विनम्र अभिवादन।
इस जन्म की आपकी रस विद्या की संपूर्ण साधना कार्य कौशलता को शत-शत नमन।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।
ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिवार, शिष्यों और समस्त आयुर्वेद जगत को यह वज्रपात सहने की शक्ति प्रदान करें।
विनम्र श्रद्धांजलि। 🙏🕯️





