चारधाम यात्रा ने बनाया नया रिकॉर्ड! 47 लाख पार हुआ श्रद्धालुओं का आंकड़ा, 2025 से 4.68 लाख ज्यादा-Newsnetra
प्रदेश में चारधाम यात्रा नया रिकॉर्ड बनाने की तरफ आगे बढ़ रही है। 114 दिनों की यात्रा में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा 47 लाख पार हो गया है। जो वर्ष 2025 की तुलना में 4.68 लाख अधिक है। बारिश व भूस्खलन की चुनौतियों के बाद भी धामों में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यात्रा को बेहद सतर्कता और निगरानी के साथ संचालित किया जा रहा है। मानसून की सक्रियता को देखते हुए सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। मुख्यमंत्री खुद राज्य आपदा कंट्रोल रूम के माध्यम से आपदा प्रबंधन पर नजर रखे हुए हैं। चारधामों और यात्रा पड़ावों में यात्रियों के ठहरने, खाने और अन्य सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर यात्रियों की मदद के लिए सुरक्षा जवानों की तैनाती की गई है।
सरकार के बेहतर आपदा प्रबंधन और इंतजामों के चलते यात्रा नया रिकॉर्ड की ओर बढ़ रही है। इस वर्ष 19 अप्रैल को गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ चारधाम यात्रा का आगाज हुआ था। 10 अगस्त तक इस यात्राकाल के 114 दिनों में कुल 47.03 श्रद्धालु चारधाम दर्शन कर चुके हैं, जबकि बीते वर्ष 2025 में इतनी ही अवधि में 42 लाख 34 हजार 147 यात्री चारधाम दर्शन को पहुंचे थे। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 4.68 लाख अधिक है। बदरीनाथ धाम में 16.12 लाख, केदारनाथ में 14.50 लाख, गंगोत्री में 7.38 लाख और यमुनोत्री धाम में 6.62 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। जबकि हेमकुंड साहिब में 2.40 से अधिक श्रद्धालु शीश नवा चुके हैं।
चारों धामों में एक दिन में पहुंचे 15 हजार से अधिक श्रद्धालु
मौसम लगातार खराब होने और प्रशासनिक अलर्ट के बावजूद सोमवार को 15 हजार 376 श्रद्धालु चारधाम दर्शन को पहुंचे। इनमें सर्वाधिक 9559 यात्री बदरीनाथ धाम पहुंचे। जबकि केदारनाथ में 4170, गंगोत्री में 1204 और यमुनोत्री धाम में 443 श्रद्धालुओं न दर्शन किए।
चारधाम यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मानसून की सक्रियता को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है। जिलाधिकारियों को सतर्क रहने को कहा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य तत्काल शुरू हो सके। भूस्खलन या अन्य किसी भी प्रकार की आपदा की स्थिति में श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर ठहराने के निर्देश दिए गए हैं।