26 साल बाद भी खत्म नहीं हुआ टिहरी बांध विस्थापितों का दर्द, पुनर्वास स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं का इंतजार-Newsnetra
टिहरी बांध परियोजना के कारण करीब 26 साल पहले विस्थापित हुए हजारों लोगों की मुश्किलें आज भी खत्म नहीं हुई। बेहतर भविष्य और सुरक्षित जीवन की उम्मीद में अपने घर-गांव छोड़कर पुनर्वास स्थलों पर पहुंचे परिवार अब भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। टिहरी बांध परियोजना की वजह से पुराना टिहरी शहर और लगभग सौ से अधिक गांव पूरी तरह विस्थापित हुए। विस्थापन के दशकों बाद भी कई पुनर्वास स्थलों पर सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है।
लोगों का कहना
विस्थापन के दौरान आश्वासन मिला था कि प्रभावितों को पुनर्वास स्थल पर टिहरी शहर से चार गुना अच्छी सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन बुनियादी सुविधा तक नहीं मिली। यही वजह है कि व्यापारी पलायन को मजबूर हैं। -देवेंद्र नौडियाल, स्थानीय निवासी
टिहरी बांध परियोजना से प्रभावित परिवारों के पूर्व लंबित जल मूल्य एवं सीवर शुल्क देयकों को माफ किया जाना था, इसका शासनादेश भी हुआ, इसके बावजूद अधिकतर प्रभावितों से पानी और सीवर शुल्क की वसूली की गई। -कमल सिंह महर, बौराड़ी निवासी
पुरानी टिहरी में चौतरफा सुविधाएं थी, व्यापारियों का अच्छा व्यापार चलता था, लेकिन यहां पुनर्वास स्थल पर पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। बौराड़ी बस अड्डे से पहले नैनीताल, चंडीगढ़, दिल्ली आदि शहरों के लिए परिवहन निगम की बस सेवाएं थी, जो कोविड के बाद से बंद हैं। -एमएल सिमल्टी, स्थानीय निवासी
क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है। अस्पताल उचित सुविधाओं, चिकित्सकों और उपकरणों की कमी के कारण केवल रेफरल सेंटर बनकर रह गए हैं। यही वजह है कि क्षेत्र के लोग मेडिकल कॉलेज की मांग के लिए आंदोलनरत हैं। -त्रिलोक सिंह रमोला, स्थानीय निवासी





