देहरादून में हजारों दुकानों पर बंदी का खतरा, 400 दुकानदारों को नोटिस से मचा हड़कंप!-Newsnetra
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून और पर्यटन नगरी मसूरी के व्यापारिक क्षेत्रों में इन दिनों हड़कंप मचा हुआ है। बरसों से अपने घरों या आवासीय परिसरों से रोजी-रोटी कमा रहे हजारों छोटे-बड़े दुकानदारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के अस्तित्व पर अब बंदी का खतरा मंडराने लगा है। माननीय सुप्रीम कोर्ट के एक सख्त आदेश के अनुपालन में मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) ने आवासीय क्षेत्रों में चल रही अनधिकृत कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
क्या है पूरा मामला?
देहरादून के विभिन्न इलाकों—जैसे राजपुर रोड, सहस्त्रधारा रोड, राजेंद्र नगर, माजरा, प्रेमनगर और ईस्ट होप टाउन—में ऐसे हजारों भवन हैं, जिनका स्वीकृत मानचित्र मूल रूप से ‘आवासीय’ (Residential) है। लेकिन इन भवनों के स्वामियों ने बिना लैंड यूज (भू-उपयोग परिवर्तन) बदले या बिना वैध कमर्शियल नक्शा पास कराए वहां दुकानें, रेस्टोरेंट, होटल, पीजी, लॉज और डेयरी जैसे व्यवसाय शुरू कर दिए। सुप्रीम कोर्ट ने रिहायशी इलाकों की मूल प्रकृति को बचाए रखने और अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए कड़ा रुख अपनाया है, जिसके बाद शासन और प्रशासन सीधे एक्शन मोड में आ गए हैं।
देहरादून के विभिन्न इलाकों—जैसे राजपुर रोड, सहस्त्रधारा रोड, राजेंद्र नगर, माजरा, प्रेमनगर और ईस्ट होप टाउन—में ऐसे हजारों भवन हैं, जिनका स्वीकृत मानचित्र मूल रूप से ‘आवासीय’ (Residential) है। लेकिन इन भवनों के स्वामियों ने बिना लैंड यूज (भू-उपयोग परिवर्तन) बदले या बिना वैध कमर्शियल नक्शा पास कराए वहां दुकानें, रेस्टोरेंट, होटल, पीजी, लॉज और डेयरी जैसे व्यवसाय शुरू कर दिए। सुप्रीम कोर्ट ने रिहायशी इलाकों की मूल प्रकृति को बचाए रखने और अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए कड़ा रुख अपनाया है, जिसके बाद शासन और प्रशासन सीधे एक्शन मोड में आ गए हैं।
150 से अधिक नोटिस और ताबड़तोड़ सीलिंग
एमडीडीए की टीमों ने शहर के अलग-अलग सेक्टरों में औचक निरीक्षण और भवनों के वास्तविक उपयोग का सर्वे तेज कर दिया है। प्राथमिक तौर पर 150 से अधिक प्रतिष्ठानों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके हैं और कई क्षेत्रों (जैसे इंजीनियर एन्क्लेव और लक्ष्मीपुर) में अवैध रूप से संचालित हो रही दुकानों को सील भी किया गया है। एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी और सचिव मोहन सिंह बर्निया के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर यह कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।
एमडीडीए की टीमों ने शहर के अलग-अलग सेक्टरों में औचक निरीक्षण और भवनों के वास्तविक उपयोग का सर्वे तेज कर दिया है। प्राथमिक तौर पर 150 से अधिक प्रतिष्ठानों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके हैं और कई क्षेत्रों (जैसे इंजीनियर एन्क्लेव और लक्ष्मीपुर) में अवैध रूप से संचालित हो रही दुकानों को सील भी किया गया है। एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी और सचिव मोहन सिंह बर्निया के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर यह कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।
व्यापारियों में भारी आक्रोश और भेदभाव के आरोप
इस कार्रवाई से सबसे ज्यादा प्रभावित छोटे और मध्यम वर्ग के दुकानदार हो रहे हैं। व्यापारी संगठनों का आरोप है कि प्रशासन का ‘डंडा’ केवल मजबूरी में घर के आगे छोटी दुकान चलाने वाले गरीबों पर चल रहा है, जबकि आवासीय क्षेत्रों में नक्शा पास कराकर बड़े पैमाने पर चल रहे कई निजी स्कूल, अस्पताल, बड़े गेस्ट हाउस और सरकारी दफ्तरों को छुआ तक नहीं जा रहा है। व्यापारियों की मांग है कि सरकार अचानक सीलिंग करने के बजाय व्यापारियों के पुनर्वास या कोई बीच का रास्ता निकालने के लिए वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) या आसान लैंड-यूज चेंज पॉलिसी लेकर आए।
इस कार्रवाई से सबसे ज्यादा प्रभावित छोटे और मध्यम वर्ग के दुकानदार हो रहे हैं। व्यापारी संगठनों का आरोप है कि प्रशासन का ‘डंडा’ केवल मजबूरी में घर के आगे छोटी दुकान चलाने वाले गरीबों पर चल रहा है, जबकि आवासीय क्षेत्रों में नक्शा पास कराकर बड़े पैमाने पर चल रहे कई निजी स्कूल, अस्पताल, बड़े गेस्ट हाउस और सरकारी दफ्तरों को छुआ तक नहीं जा रहा है। व्यापारियों की मांग है कि सरकार अचानक सीलिंग करने के बजाय व्यापारियों के पुनर्वास या कोई बीच का रास्ता निकालने के लिए वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) या आसान लैंड-यूज चेंज पॉलिसी लेकर आए।
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बढ़ा राजनीतिक दबाव
राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस मुद्दे ने भारी राजनीतिक रूप ले लिया है। हजारों परिवारों के रोजगार छिनने की नौबत को देखते हुए स्थानीय विधायक और कैबिनेट मंत्री भी गहरे दबाव में हैं। हाल ही में देहरादून के प्रभारी मंत्री सुबोध उनियाल के आवास पर कैबिनेट मंत्रियों और स्थानीय विधायकों (गणेश जोशी, खजान दास, सविता कपूर आदि) की एक आपात उच्चस्तरीय बैठक हुई। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए आम जनता और व्यापारियों को किस तरह राहत दी जाए, इसके कानूनी पहलुओं को खंगाला जा रहा है।
राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस मुद्दे ने भारी राजनीतिक रूप ले लिया है। हजारों परिवारों के रोजगार छिनने की नौबत को देखते हुए स्थानीय विधायक और कैबिनेट मंत्री भी गहरे दबाव में हैं। हाल ही में देहरादून के प्रभारी मंत्री सुबोध उनियाल के आवास पर कैबिनेट मंत्रियों और स्थानीय विधायकों (गणेश जोशी, खजान दास, सविता कपूर आदि) की एक आपात उच्चस्तरीय बैठक हुई। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए आम जनता और व्यापारियों को किस तरह राहत दी जाए, इसके कानूनी पहलुओं को खंगाला जा रहा है।
आगे की राह
एक तरफ जहां राजधानी को व्यवस्थित और स्मार्ट बनाने के लिए मास्टर प्लान और नियमों का पालन बेहद जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ दशकों से चल रहे रोजगार को एक झटके में बंद कर देना मानवीय और आर्थिक दृष्टिकोण से एक बड़ी चुनौती है। अब सबकी निगाहें राज्य सरकार और एमडीडीए के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वे कोई ऐसी बीच की राह निकाल पाते हैं जिससे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना भी न हो और दून के हजारों व्यापारियों की रोजी-रोटी भी बच सके।
एक तरफ जहां राजधानी को व्यवस्थित और स्मार्ट बनाने के लिए मास्टर प्लान और नियमों का पालन बेहद जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ दशकों से चल रहे रोजगार को एक झटके में बंद कर देना मानवीय और आर्थिक दृष्टिकोण से एक बड़ी चुनौती है। अब सबकी निगाहें राज्य सरकार और एमडीडीए के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वे कोई ऐसी बीच की राह निकाल पाते हैं जिससे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना भी न हो और दून के हजारों व्यापारियों की रोजी-रोटी भी बच सके।






