भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड में धूमधाम से मनाई गई चरक जयंती महर्षि चरक के आयुर्वेद एवं मानव स्वास्थ्य में अतुलनीय योगदान को किया याद, चरक संहिता की वर्तमान समय में उपयोगिता पर विशेषज्ञों ने डाला प्रकाश-Newsnetra
देहरादून, 17 अगस्त 2026।
भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड के सभागार में सोमवार को महर्षि चरक जयंती समारोह श्रद्धा एवं उत्साह के साथ आयोजित किया गया। आयुर्वेद के महान आचार्य एवं चरक संहिता के रचयिता महर्षि चरक के प्राकट्य उत्सव के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत महर्षि चरक की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। उपस्थित अतिथियों, आयुर्वेद चिकित्सकों एवं परिषद के अधिकारियों और कर्मचारियों ने महर्षि चरक को नमन करते हुए आयुर्वेद के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान को याद किया।







कार्यक्रम में प्रो. डॉ. राधा वल्लभ सती, पूर्व प्राचार्य, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, हर्रावाला मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में सम्मिलित हुए। उन्होंने महर्षि चरक और चरक संहिता के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि आचार्य अग्निवेश द्वारा प्रणीत अग्निवेश तंत्र को प्रतिसंस्कृत कर प्रस्तुत की गई चरक संहिता केवल आयुर्वेद जगत के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव समाज और स्वास्थ्य विज्ञान के लिए विशिष्ट महत्व रखती है।
प्रो. डॉ. सती ने चरक संहिता में वर्णित ऋतुचर्या, आहार-विहार, स्वास्थ्य संरक्षण के सिद्धांतों, रोगों से बचाव तथा विभिन्न व्याधियों की चिकित्सा पर विस्तार से व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि चरक संहिता में वर्णित अनेक सिद्धांत आज के बदलते जीवन एवं जीवनशैलीजन्य रोगों के दौर में भी अत्यंत प्रासंगिक हैं। स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा और रोगी के रोग का शमन आयुर्वेद का मूल उद्देश्य है, जिसकी व्यापक व्याख्या चरक संहिता में देखने को मिलती है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड के अध्यक्ष डॉ. जे.एन. नौटियाल ने महर्षि चरक के जीवन, उनके चिकित्सा दर्शन और चरक संहिता के महत्व के विषय में उपस्थित श्रोताओं को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा की वैज्ञानिक परंपरा को समझने के लिए चरक संहिता का अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण है और नई पीढ़ी के आयुर्वेद चिकित्सकों को इसके मूल सिद्धांतों को व्यावहारिक चिकित्सा में आत्मसात करना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती नर्मदा गुसाईं, रजिस्ट्रार, भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड ने की। उन्होंने सभी आमंत्रित अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि महर्षि चरक द्वारा आयुर्वेद और मानव स्वास्थ्य के क्षेत्र में दिया गया योगदान युगों-युगों तक समाज का मार्गदर्शन करता रहेगा। उन्होंने आयुर्वेद से जुड़े चिकित्सकों से महर्षि चरक के सिद्धांतों को जनसामान्य तक पहुंचाने का भी आह्वान किया।
समारोह में विशिष्ट आमंत्रित अतिथि के रूप में भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड के बोर्ड सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह राणा तथा पूर्व बोर्ड सदस्य डॉ. शहदाब खान उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण वरिष्ठ पत्रकार जयवीर पुंडीर का वक्तव्य रहा। महर्षि चरक की जन्मस्थली से संबंधित चरक डांडा पर विशेष डॉक्यूमेंट्री तैयार कर चुके जयवीर पुंडीर ने चरक डांडा के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कोटद्वार के निकट स्थित चरक डांडा को महर्षि चरक की जन्म एवं कर्मस्थली से जोड़ते हुए इससे संबंधित विभिन्न ऐतिहासिक और स्थानीय संदर्भों से उपस्थित लोगों को अवगत कराया।
कार्यक्रम का मंच संचालन संदीप तोपवाल ने किया। समारोह में भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड के डिप्टी रजिस्ट्रार संदीप सेमवाल सहित परिषद के समस्त स्टाफ ने सहभागिता की।
इस अवसर पर आयुर्वेद चिकित्सक एवं अन्य गणमान्य लोगों में डॉ. अनीता भट्ट, वरिष्ठ पत्रकार विक्रम श्रीवास्तव, गौरव पैन्यूली, सौरभ पैन्यूली, नीरज, आयुष राणा और कुलदीप सिंह सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। नेत्र ब्रॉडकास्ट क्रिएशन की पूरी टीम ने भी समारोह में सहभागिता की। सभी ने महर्षि चरक की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की।
हा समारोह के समापन पर वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि महर्षि चरक की शिक्षाएं केवल रोगों की चिकित्सा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार, उचित दिनचर्या, ऋतुचर्या और रोगों की रोकथाम के माध्यम से स्वस्थ समाज के निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त करती हैं।





