रामनगर से चारधाम यात्रा का संचालन परंपरा के विरुद्ध : गंगोत्री रावल अशोक सेमवाल-Newsnetra
श्री गंगा पुरोहित सभा ने सरकार के फैसले के प्रति जताई कड़ी नाराजगी
उत्तराखण्ड के माननीय मुख्यमंत्री द्वारा चार धाम यात्रा को पारंपरिक रूट ऋषिकेश और हरिद्वार से बदलकर रामनगर से शुरू करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। यह निर्णय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के खिलाफ माना जा रहा है, जिससे संबंधित लोगों में गहरी चिंता और असंतोष फैल रहा है।
चार धाम यात्रा, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण धार्मिक तीर्थयात्रा है, जो चार प्रमुख धामों- बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा करती है। इस यात्रा की शुरुआत परंपरागत रूप से ऋषिकेश और हरिद्वार से होती आई है। इस परंपरा में परिवर्तन न केवल धार्मिक आस्थाओं के साथ खिलवाड़ होगा, बल्कि इससे जुड़े धार्मिक पर्यटन उद्योग पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

सरकार के इस निर्णय से स्थानीय व्यवसाय, पंडित, तीर्थ पुरोहित और उन सभी लोगों की आजीविका प्रभावित होगी, जो चार धाम यात्रा के पारंपरिक मार्ग पर अपनी आजीविका निर्भर करते हैं। इस प्रस्ताव के खिलाफ जनमानस ने कड़ा विरोध जताया है और चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने परंपरागत यात्रा मार्ग में बदलाव किया तो व्यापक विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
हम माननीय प्रधानमंत्री जी से विनम्र निवेदन करते हैं कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और उत्तराखण्ड सरकार को रामनगर से चार धाम यात्रा के प्रस्ताव को निरस्त करने का निर्देश दें। साथ ही, हम आग्रह करते हैं कि चार धाम यात्रा के विकास कार्यों में तेजी लाई जाए ताकि तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाजनक और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित हो सके।

धार्मिक आस्था और परंपराओं का सम्मान बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। चार धाम यात्रा न केवल धार्मिक महत्व रखती है बल्कि उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक धरोहर और आर्थिक स्थिति से भी जुड़ी हुई है। इसीलिए, हम उम्मीद करते हैं कि सरकार हमारी भावनाओं और परंपराओं का सम्मान करेगी और चार धाम यात्रा को पूर्व परंपरानुसार ही सुचारू रूप से चलने देगी।





