अगस्त-सितंबर में प्रस्तावित नंदा देवी राजजात स्थगित, कब होगी ? इसकी वसंत पंचमी पर होगी घोषणा
नंदा राजजात हर 12 वर्ष में आयोजित होने वाली सबसे लंबी पैदल यात्रा है। 280 किमी लंबी यह यात्रा 20 दिन चलनी थी। लेकिन अब समिति का कहना है कि यह जात इस वर्ष नहीं हो सकेगी।
इस वर्ष अगस्त-सितंबर माह में प्रस्तावित हिमालीय महाकुंभ श्रीनंदा देवी राजजात 2026 को स्थगित कर दिया गया है। इस साल मलमास होने के कारण यात्रा सितंबर माह के अंत में समाप्त होने, यात्रा समाप्ति पर बुग्यालों में बर्फ होने, राजजात के पड़ावों पर ढांचागत सुविधा के कार्य नहीं होने और प्रशासन के पुनर्विचार पत्र पर समिति ने इसका फैसला लिया। अब वसंत पंचमी को राजजात किस वर्ष होगी इसका कार्यक्रम जारी किया जाएगा।
कांसुवा-नौटी से होमकुंड और वापस नौटी तक होने वाली सचल महाकुंभ श्रीनंदा देवी राजजात का इंतजार बढ़ गया है। बीते तीन वर्षों से समिति ने इस वर्ष अगस्त-सितंबर माह में यात्रा प्रस्तावित की थी लेकिन अब इसे स्थगित कर दिया गया है। रविवार को कर्णप्रयाग में आयोजित श्रीनंदा देवी राजजात समिति की कोर कमेटी की बैठक की गई। समिति के अध्यक्ष और कांसुवा के राजकुंवर डॉ. राकेश कुंवर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में बीते वर्ष अक्तूबर माह में हुई अध्ययन यात्रा की रिपोर्ट और प्रशासन के पुनर्विचार पत्र को आधार बनाया गया। साथ ही कहा गया कि मई-जून में मलमास के कारण होमकुंड में पूजा की तिथि 20 सितंबर पड़ रही है।
इस दौरान बुग्याली क्षेत्र का मौसम अनुकूल नहीं होता है। यहां बर्फ होती है। ऐसे में यात्रा जोखिम भरी हो सकती है। इसके साथ ही राजजात के पड़ावों पर ढांचागत सुविधा के कार्य नहीं हुए हैं। इसके साथ ही प्रशासन के पुनर्विचार पत्र पर भी समिति ने विचार किया है। लिहाजा इस वर्ष राजजात को स्थगित करने का निर्णय लिया गया। बैठक में समिति के सचिव भुवन नौटियाल, पंडित महानंद मैठाणी, कोषाध्यक्ष सुशील रावत, जयविक्रम सिंह कुंवर, देवराड़ा मंदिर समिति के अध्यक्ष भुवन हटवाल, विजेंद्र रावत, देवाल के पूर्व प्रमुख डीडी कुनियाल और पृथ्वी सिंह रावत मौजूद रहे। वहीं महेंद्र कुंवर बैठक में वर्चुअली जुड़े।
राजजात कब होगी, वसंत पंचमी को होगी घोषणा
समिति ने कहा कि अब 2026 की राजजात की कोई अधिकारिक घोषणा नहीं थी। वसंत पंचमी को श्रीनंदा देवी राजजात की मनौती की जाएगी। यही नहीं मनौती तक के सभी कार्यक्रम पूर्ववत रहेंगे। सिर्फ राजजात के कार्यक्रम दिनपट्टा जारी नहीं होगा। वसंत पंचमी को राजकुंवरों की ओर से ज्योतिष गणना के बाद राजजात कब होगी इसकी घोषणा कर दी जाएगी।
समिति ने बैठक में ये प्रस्ताव किए पारित
कर्णप्रयाग में आयोजित श्रीनंदा देवी राजजात समिति की कोर कमेटी की बैठक में राजजात 2026 को स्थगित करते हुए 2027 के लिए प्रस्तावित किया गया। इसकी अधिकारिक घोषणा वसंत पंचमी के दिन होने वाली मनौती में करने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही कई प्रस्ताव पारित किए गए। समिति ने प्रशासनिक ढांचा एवं प्राधिकरण का गठन, तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारी और जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समितियों का गठन करते हुए मंदिर समितियों, हक-हकूकधारियों और जन-प्रतिनिधियों को शामिल करने, वित्तीय प्रावधान एवं बजट, बजट में श्री नंदादेवी राजजात मद का स्थायी सृजन करने, जिला योजना में अलग मद बनाने, संयुक्त मैप बनाने, बधाण की मां नंदादेवी के सभी पड़ावों को आधिकारिक पड़ाव घोषित करने के अलावा देवराडा व कुरुड़ को पर्यटन विभाग के मानचित्र में दर्ज करने, राजजात में शामिल होने वाली सभी डोलियों और यात्रियों के लिए सहायक मार्गों और पड़ावों पर ढांचागत सुविधाएं जुटाने के प्रस्ताव पारित किए गए।
प्रशासन ने समिति को दिया था यात्रा पर पुनर्विचार का पत्र
23 जनवरी को वसंत पंचमी को होने वाले मनौती महोत्सव में श्रीनंदा देवी राजजात 2026 का कार्यक्रम जारी होने से पहले ही प्रशासन के पत्र का समिति ने संज्ञान लिया। प्रशासन ने समिति को कई बिंदुओं को आधार बनाकर पुनर्विचार करने का पत्र सौंपा।
समिति को चमोली जिला प्रशासन ने पत्र भेजते हुए कहा कि पैदल महाकुंभ के रूप में होने वाली विश्व प्रसिद्ध श्रीनंदा देवी राजजात ऐतिहासिक तथा आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। इस यात्रा का सातवीं या आठवीं सदी से यात्रा का आयोजन होता रहा है। इस यात्रा में चौसिंग्या मेंढा (चार सींगों वाला भेड़) यात्रा के पथ प्रदर्शक के रूप में चलता है। यात्रा मायके की छंतोली रिंगाल तथा ससुराल पक्ष की छंतौली भोजपत्र की ओर से निर्मित होती है। इसमें जनपद के अलावा कुमाऊं के देवी देवताओं के निशान-प्रतीक (भंकोर, शंख, त्रिशूल आदि) लेकर श्रद्धालु आते हैं। कहा गया कि यात्रा की तैयारियां शासन स्तर पर की जा रही हैं। बावजूद वर्ष 2025 में कई क्षेत्रों में भारी बारिश एवं बादल फटने की घटनाएं हुई हैं। इसमें देवाल, थराली एवं नंदानगर ब्लॉक मुख्य रूप से प्रभावित हुए हैं। यहां पुनर्निर्माण कार्य जारी हैं। यात्रा में श्रद्धालुओं की भारी संख्या और निर्जन क्षेत्र सहित आपदा को देखते हुए प्रशासन ने समिति से जनसुरक्षा के निमित्त अपेक्षित निर्णय लेने की बात कही। मलमास की अड़चन के साथ इस पत्र को समिति ने आधार बनाते हुए कहा कि जनसुरक्षा के तहत यह फैसला लिया गया है