माध्यमिक स्कूलों से लेकर महाविद्यालयों तक पुस्तकालयों को मिले मजबूती, पुस्तकालयाध्यक्षों की हो नियुक्ति : राकेश जोशी-Newsnetra


उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत को देवभूमि लाइब्रेरी एसोसिएशन की ओर से भेजा गया पुस्तकालय विकास संबंधी सुझाव पत्र
देहरादून, 13 जुलाई।
देवभूमि लाइब्रेरी एसोसिएशन समिति (DBLA), देहरादून के अध्यक्ष राकेश जोशी ने उत्तराखंड के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत से राज्य के माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा संस्थानों में पुस्तकालय व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की अपील की है। उन्होंने एक विस्तृत पुस्तकालय संदेश के माध्यम से विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों में पुस्तकालयों के विकास और प्रशिक्षित पुस्तकालयाध्यक्षों की नियुक्ति की आवश्यकता पर जोर दिया।
राकेश जोशी ने कहा कि विकसित समाज की पहचान उसके सशक्त सार्वजनिक पुस्तकालयों से होती है। जहां पुस्तकालय बेहतर होते हैं, वहां विद्यार्थी, शोधार्थी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा घंटों अध्ययन करते दिखाई देते हैं। उनका कहना है कि किसी भी शिक्षण संस्थान की गुणवत्ता का आकलन उसकी लाइब्रेरी से किया जा सकता है, क्योंकि पुस्तकालय को किसी भी संस्थान का “हार्ट ऑफ इंस्टीट्यूट” माना जाता है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में पुस्तकालय केवल पुस्तकों का संग्रह नहीं हैं, बल्कि सूचना संरक्षण, ज्ञान प्रबंधन और शोध गतिविधियों के महत्वपूर्ण केंद्र बन चुके हैं। आज जिस राष्ट्र के पास नवीनतम और उपयोगी सूचनाओं का बेहतर तंत्र होगा, वही विकास की दौड़ में आगे रहेगा।
राकेश जोशी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड के अधिकांश माध्यमिक विद्यालयों में पुस्तकालय या तो संचालित नहीं हो रहे हैं अथवा वहां प्रशिक्षित पुस्तकालयाध्यक्ष उपलब्ध नहीं हैं। वहीं कई डिग्री कॉलेजों में भी पुस्तकालयों में पर्याप्त स्टाफ का अभाव है। उन्होंने कहा कि नवोदय विद्यालयों और केंद्रीय विद्यालयों की तर्ज पर राज्य के सभी माध्यमिक विद्यालयों में भी पुस्तकालय व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।
उन्होंने अपने संदेश में यह भी उल्लेख किया कि देहरादून स्थित दून लाइब्रेरी जैसे संस्थानों में पाठकों की बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है कि समाज में अध्ययन संस्कृति को लेकर रुचि लगातार बढ़ रही है। ऐसे में पुस्तकालयों का विस्तार समय की आवश्यकता है।
राकेश जोशी ने उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत से आग्रह किया कि राज्य के प्रत्येक माध्यमिक विद्यालय में कम से कम एक प्रशिक्षित पुस्तकालयाध्यक्ष की नियुक्ति की जाए तथा महाविद्यालयों के पुस्तकालयों में दो से तीन पुस्तकालय विज्ञान प्रशिक्षित कर्मियों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि इससे विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध होगी तथा प्रदेश में ज्ञान आधारित शिक्षा प्रणाली को नई दिशा मिलेगी।
देवभूमि लाइब्रेरी एसोसिएशन ने विश्वास व्यक्त किया है कि राज्य सरकार भविष्य में पुस्तकालयों के विकास, पाठकों के हितों की रक्षा और ज्ञान संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी कदम उठाएगी।





