कारगिल विजय में उत्तराखंड के रणबांकुरों का भी अहम योगदान, वीरभूमि उत्तराखंड ने राष्ट्र रक्षा में निभाई अद्वितीय भूमिका— नागेंद्र सिंह चौहान-Newsnetra
उत्तरकाशी, 26 जुलाई।
कारगिल विजय दिवस केवल भारत की सैन्य सफलता का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह उन अमर वीरों के अदम्य साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति का स्मरण दिवस भी है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। वर्ष 1999 में हुए कारगिल युद्ध में भारतीय सेना ने दुर्गम पर्वतीय परिस्थितियों में अद्वितीय शौर्य का परिचय देते हुए पाकिस्तान समर्थित घुसपैठियों को परास्त किया और तिरंगे की शान को अक्षुण्ण रखा। यह विजय आज भी देशवासियों को राष्ट्र सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देती है।
उत्तराखंड को सदियों से “वीरभूमि” कहा जाता है। यहां के युवाओं ने भारतीय सेना, अर्धसैनिक बलों और सुरक्षा सेवाओं में अपनी वीरता का ऐसा इतिहास रचा है, जिस पर पूरा देश गर्व करता है। कारगिल युद्ध के दौरान भी उत्तराखंड के अनेक वीर सैनिकों ने अग्रिम मोर्चों पर लड़ते हुए अपने अदम्य साहस का परिचय दिया। कई रणबांकुरों ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया, जबकि अनेक सैनिकों ने कठिनतम परिस्थितियों में दुश्मन की चौकियों पर विजय प्राप्त कर भारत का गौरव बढ़ाया।
विशेष रूप से उत्तरकाशी, चमोली, पौड़ी, टिहरी, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और रुद्रप्रयाग जैसे पर्वतीय जिलों के सैनिकों ने भारतीय सेना की विभिन्न रेजिमेंटों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हिमालय की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में पले-बढ़े इन जवानों की शारीरिक क्षमता, धैर्य और पर्वतीय युद्ध कौशल ने कारगिल अभियान में भारतीय सेना को उल्लेखनीय बढ़त दिलाई। यही कारण है कि उत्तराखंड को देश की सैन्य शक्ति की मजबूत आधारशिला माना जाता है।
कारगिल युद्ध ने पूरे देश को यह संदेश दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व भी है। सैनिक सीमाओं पर लड़ते हैं, जबकि समाज उनके परिवारों के सम्मान, सहयोग और मनोबल को बनाए रखने का कार्य करता है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि शहीदों के परिवारों का सम्मान केवल समारोहों तक सीमित न रहे, बल्कि उनके कल्याण के लिए समाज निरंतर संवेदनशील बना रहे।
आज आवश्यकता इस बात की भी है कि नई पीढ़ी कारगिल के इतिहास, ऑपरेशन विजय और हमारे वीर सैनिकों के बलिदान को जाने। विद्यालयों, महाविद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं में ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएँ, जिनसे युवाओं में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और सेवा का भाव विकसित हो। आधुनिक भारत के निर्माण में वही युवा सबसे बड़ी शक्ति बनेंगे, जो अपने इतिहास और अपने वीरों पर गर्व करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, आधुनिक सैन्य तकनीक, सीमा अवसंरचना और सैनिकों की सुविधाओं को नई प्राथमिकता दी है। आज भारतीय सेना पहले की तुलना में अधिक सशक्त, आधुनिक और सक्षम होकर देश की सीमाओं की रक्षा कर रही है। कारगिल युद्ध से मिले अनुभवों ने भी भारत की सैन्य रणनीति और सीमाई तैयारियों को नई दिशा दी है।
कारगिल विजय दिवस हम सभी के लिए केवल एक स्मृति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकल्प का दिवस है। यह हमें याद दिलाता है कि भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए हमारे वीर जवान हर परिस्थिति में तैयार रहते हैं। उनका साहस और बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।
न्यूज नेत्र परिवार कारगिल के सभी अमर शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है तथा उत्तराखंड के उन सभी रणबांकुरों को नमन करता है, जिन्होंने राष्ट्र रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देकर भारत का मस्तक विश्व में ऊँचा किया।





