पदोन्नति में आरक्षण पर हाईकोर्ट का अहम फैसला, सचिवालय SC/ST समिति को प्रतिवेदन देने के निर्देश-Newsnetra
दिनांक 20.03.2026 को पदोन्नति में आरक्षण को लेकर सचिवालय एससी एसटी समिति द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई का निर्णय.
मामला: WPSB/479/2022
माननीय न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी
माननीय न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित
- याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता श्री हरि मोहन भाटिया उपस्थित हुए।
- राज्य उत्तराखंड की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता श्री जे.पी. जोशी उपस्थित हुए।
- याचिकाकर्ता विभिन्न आरक्षित श्रेणियों से संबंधित हैं और उत्तराखंड सचिवालय में कार्यरत हैं। उनका कहना है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने सिविल अपील संख्या 629/2022 में कुछ निर्देश जारी किए थे, जिनका अब तक राज्य सरकार द्वारा पालन नहीं किया गया है।
- इस रिट याचिका के माध्यम से याचिकाकर्ताओं ने निम्नलिखित राहत मांगी है—
(i) प्रतिवादी को यह निर्देश देने हेतु रिट/आदेश जारी किया जाए कि वह माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 629/2022 (जर्नैल सिंह बनाम लच्छमी नारायण गुप्ता, दिनांक 28.01.2022) में दिए गए निर्देशों के अनुसार कार्रवाई पूर्ण करे।
राज्य उत्तराखंड में किसी भी सेवा में पदोन्नति करने से पहले, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कैडर-वार प्रतिनिधित्व की कमी का आकलन करते हुए प्रत्येक सेवा के लिए कैडर-वार रोस्टर तैयार किया जाए। - राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता श्री जे.पी. जोशी ने प्रस्तुत किया कि सिविल अपील संख्या 629/2022 (जर्नैल सिंह बनाम लच्छमी नारायण गुप्ता) अभी भी माननीय सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है और उसमें दिए गए निर्देश अंतरिम (अस्थायी) प्रकृति के हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के एम. नागराज मामले के निर्णय के अनुसार न्यायमूर्ति इरशाद हुसैन समिति का गठन किया है। यह समिति अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को दे चुकी है और मामला अभी राज्य सरकार के विचाराधीन है। - बहस के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता श्री हरि मोहन भाटिया ने निवेदन किया कि याचिकाकर्ताओं को कार्मिक एवं नियुक्ति विभाग के सचिव के समक्ष प्रतिवेदन (representation) प्रस्तुत करने की अनुमति दी जाए, और सचिव को उस पर निर्णय लेने का निर्देश दिया जाए।
- न्यायालय ने रिट याचिका का निस्तारण करते हुए यह आदेश दिया—
याचिकाकर्ताओं को यह स्वतंत्रता दी जाती है कि वे आज से दो सप्ताह के भीतर उत्तराखंड सरकार के कार्मिक एवं नियुक्ति विभाग के सचिव के समक्ष संयुक्त प्रतिवेदन प्रस्तुत करें।
यदि याचिकाकर्ता निर्धारित समय में प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हैं, तो संबंधित सचिव उस पर यथाशीघ्र निर्णय लेने का प्रयास करेंगे।
निर्णय लेने की अवधि अधिकतम 9 माह के भीतर, इस आदेश की प्रमाणित प्रति के साथ प्रतिवेदन प्रस्तुत करने की तिथि से मानी जाएगी।
आदेश दिनांक: 20.03.2026
(न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित)
(न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी)





