“एक शोकाकुल पिता के आंसुओं को भी ‘स्क्रिप्टेड’ बताने वाली भाजपा अपनी संवेदनाएं खो चुकी है” – गरिमा मेहरा दसौनी-Newsnetra
उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट द्वारा नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी के “छात्रों की गूंज” युवा संवाद कार्यक्रम को “स्क्रिप्टेड” और “फिक्स्ड” बताए जाने वाले बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह बयान केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि अमानवीय, असंवेदनशील और शर्मनाक है।
दसौनी ने कहा कि शायद महेंद्र भट्ट कभी उस पिता की पीड़ा को समझ ही नहीं सकते जिसने अपनी होनहार बेटी को खो दिया हो। राहुल गांधी के मंच पर स्वर्गीय रिया कुमारी थापा के पिता श्री राजेश मल मौजूद थे। उन्होंने रुंधे गले से अपनी बेटी के सपनों, उसकी मेहनत और उस त्रासदी का दर्द साझा किया, जिसने उनका पूरा परिवार उजाड़ दिया। उन्होंने राहुल गांधी से अपनी बेटी सहित उन तमाम छात्रों के लिए न्याय की गुहार लगाई, जिन्होंने कथित नीट पेपर लीक प्रकरण के बाद निराशा में अपनी जान गंवाई। अपनी बात कहते-कहते एक पिता फूट-फूटकर रो पड़ा। हजारों लोगों की आंखें नम हो गईं, लेकिन भाजपा नेताओं का हृदय नहीं पसीजा।
उन्होंने कहा कि जिस दल के नेता एक शोकाकुल पिता के आंसुओं को भी “स्क्रिप्टेड” बता दें, उससे संवेदनशीलता की कोई उम्मीद नहीं की जा सकती। भाजपा ने उन मासूम बच्चों को श्रद्धांजलि देना तो दूर, उनके दर्द का भी उपहास उड़ाने का काम किया है।
गरिमा मेहरा दसौनी ने आरोप लगाया कि भाजपा ने राहुल गांधी के कार्यक्रम को रोकने के लिए हर संभव हथकंडा अपनाया। कांग्रेस को पहले परेड ग्राउंड की अनुमति दी गई, फिर ऐन वक्त पर उसे निरस्त कर दिया गया और कार्यक्रम को बन्नू स्कूल मैदान में स्थानांतरित करने के लिए विवश किया गया। कानून-व्यवस्था का बहाना बनाया गया, लेकिन उसी परेड ग्राउंड में तत्काल पंजाबी गायिका जैस्मीन सैंडलस का कार्यक्रम आयोजित कर दिया गया और उसे आम जनता के लिए निशुल्क कर दिया गया। इससे साफ हो गया कि प्रशासनिक फैसले निष्पक्ष नहीं बल्कि राजनीतिक दबाव में लिए गए।
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर भाजपा ने अपनी महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं को भ्रमित कर कांग्रेस के खिलाफ खड़ा करने का प्रयास किया, जबकि महिला आरक्षण विधेयक वर्ष 2023 में संसद से पारित हो चुका है और कांग्रेस ने उसका समर्थन किया था। जनता अब भाजपा की इस राजनीति को भलीभांति समझ चुकी है।
दसौनी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पांच वर्षों में कभी युवाओं की याद नहीं आई। बेरोजगार युवाओं पर लाठियां बरसाईं गईं, भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक हुए, युवाओं पर मुकदमे दर्ज किए गए, लेकिन संवाद कभी नहीं किया गया। राहुल गांधी के ऐतिहासिक युवा संवाद की अभूतपूर्व सफलता देखकर भाजपा को भी अचानक युवाओं से संवाद करने की सूझ गई।
उन्होंने कहा कि तमाम षड्यंत्रों, प्रशासनिक अड़चनों और राजनीतिक बाधाओं के बावजूद राहुल गांधी का “छात्रों की गूंज” कार्यक्रम ऐतिहासिक रूप से सफल रहा। हजारों युवाओं की उपस्थिति ने स्पष्ट संदेश दिया कि उत्तराखंड का युवा अब अपने भविष्य, शिक्षा, रोजगार और न्याय की लड़ाई में राहुल गांधी के साथ खड़ा है।
अंत में गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि भाजपा की बौखलाहट इस बात का प्रमाण है कि राहुल गांधी का संवाद सत्ता के प्रचार से कहीं अधिक प्रभावी साबित हुआ। सच यह है कि राहुल गांधी युवाओं के दिलों तक पहुंचे और भाजपा के नेताओं की राजनीतिक जमीन खिसक गई। अब भाजपा के पास युवाओं के सवालों का जवाब नहीं है, इसलिए वह उनकी आवाज को “स्क्रिप्टेड” बताकर अपमानित करने का प्रयास कर रही है। उत्तराखंड की जनता और युवा इस मानसिकता का उचित जवाब देंगे।





