दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने पर गरिमा दसोनी का सवाल, ‘अंकिता के माता-पिता के आंसुओं का हिसाब भाजपा को देना होगा’-Newsnetra
देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद कांग्रेस ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता गरिमा दसोनी ने भाजपा हाईकमान पर निशाना साधते हुए कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े सवालों और वीआईपी की कथित भूमिका को लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। ऐसे में दुष्यंत गौतम को संवैधानिक पद पर नियुक्त किया जाना उत्तराखंड के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला निर्णय है।
गरिमा दसोनी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उत्तराखंड के लोगों के जख्म अभी भरे नहीं हैं। अंकिता भंडारी के माता-पिता लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं और मामले में वीआईपी की कथित भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जाते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गंभीर आरोपों और जांच की मांगों के बीच दुष्यंत गौतम को उत्तराखंड में भाजपा के प्रभारी पद से हटाए जाने के बाद अब राज्यपाल जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर नियुक्त करना कई सवाल खड़े करता है।
‘आखिर क्या करके मानेगी भाजपा?’
गरिमा दसोनी ने भाजपा के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सवाल किया कि आखिर भाजपा उत्तराखंड के लोगों की भावनाओं को कितनी बार आहत करेगी। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर प्रदेश की जनता के मन में अब भी कई सवाल हैं। उनके अनुसार, जब तक मामले से जुड़े सभी सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं मिलता और पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक इस तरह की नियुक्तियां लोगों के बीच असंतोष बढ़ा सकती हैं।
उन्होंने कहा कि दुष्यंत गौतम को उत्तराखंड में प्रभारी पद से हटाया गया, लेकिन उनके अनुसार न तो आरोपों को लेकर कोई स्पष्ट जवाब सामने आया और न ही उन सवालों का पटाक्षेप हुआ, जिन्हें विपक्ष लगातार उठा रहा है। गरिमा दसोनी ने इस नियुक्ति को भाजपा हाईकमान का ऐसा फैसला बताया, जो उत्तराखंड के लोगों के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाता है।
वीआईपी के सवाल पर जांच और जवाबदेही की मांग
अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की पहचान को लेकर उठते रहे सवालों का जिक्र करते हुए गरिमा दसोनी ने कहा कि विपक्ष लगातार इस मामले में स्पष्टता और जवाबदेही की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा कि अंकिता के माता-पिता को न्याय मिलना चाहिए और मामले से जुड़े सभी सवालों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
गरिमा दसोनी ने भाजपा पर आरोप लगाया कि एक ओर प्रदेश में अंकिता को न्याय दिलाने की मांग जारी है, वहीं दूसरी ओर दुष्यंत गौतम को संवैधानिक पद पर नियुक्त किया जाना लोगों की भावनाओं के विपरीत है। उन्होंने कहा कि अंकिता के माता-पिता के आंसुओं और उनकी न्याय की लड़ाई को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
सिक्किम की महिलाओं को भी किया सतर्क रहने का आह्वान
अपने बयान में गरिमा दसोनी ने सिक्किम की महिलाओं से भी सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने दुष्यंत गौतम को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि उत्तराखंड में उठे सवालों के बीच उनकी नियुक्ति पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। यह टिप्पणी उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा है।
उन्होंने भाजपा हाईकमान से सवाल किया कि क्या उत्तराखंड के लोगों की भावनाओं और अंकिता भंडारी के परिवार की न्याय की मांग से जुड़े मुद्दों को इस तरह नजरअंदाज किया जा सकता है। उनके अनुसार, किसी भी संवैधानिक पद पर नियुक्ति को लेकर उठने वाले सवालों का जवाब पारदर्शिता और जवाबदेही के जरिए दिया जाना चाहिए।
अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग फिर तेज
गरिमा दसोनी ने अपने बयान के अंत में कहा कि अंकिता भंडारी के परिवार को न्याय मिलना बेहद जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के फैसले से उत्तराखंड के लोगों के बीच यह संदेश जा रहा है कि उनकी भावनाओं और सवालों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग केवल एक परिवार का मुद्दा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और न्याय व्यवस्था पर भरोसे से जुड़ा विषय है। उन्होंने भाजपा हाईकमान से इस मामले में उठ रहे सवालों का जवाब देने और पीड़ित परिवार की न्याय की मांग को गंभीरता से लेने की अपील की।
नोट: दुष्यंत कुमार गौतम को लेकर लगाए गए आरोप और गरिमा दसोनी की टिप्पणियां उनके राजनीतिक बयान के रूप में प्रस्तुत की गई हैं। इन टिप्पणियों को किसी व्यक्ति के दोषी होने का न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। हत्याकांड और उससे जुड़े आरोपों पर निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।







