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Reading: पहाड़ की बेटी अंजली बिष्ट: कभी Drawing Teacher बनने का था सपना, आज कला के हुनर से खड़ी की अपनी पहचान-Newsnetra
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पहाड़ की बेटी अंजली बिष्ट: कभी Drawing Teacher बनने का था सपना, आज कला के हुनर से खड़ी की अपनी पहचान-Newsnetra

News Netra Admin
Last updated: 2026/08/15 at 2:59 PM
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पहाड़ की बेटी अंजली बिष्ट: कभी Drawing Teacher बनने का था सपना, आज कला के हुनर से खड़ी की अपनी पहचान-Newsnetra

गांव से शुरू हुआ सफर, जहां पढ़ाई के साथ निभाईं घर की जिम्मेदारियां

कोटद्वार: पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार की रहने वाली अंजली बिष्ट की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपने हुनर को पहचानकर उसे रोजगार और अपनी पहचान में बदलना चाहते हैं।

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अंजली की शुरुआती शिक्षा उनके पैतृक गांव सिनाला, विकासखंड रिखणीखाल के राजकीय इंटर कॉलेज (GIC) डाबरी से हुई। उन्होंने बारहवीं तक की पढ़ाई गांव से ही पूरी की।

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जब अंजली आठवीं कक्षा में थीं, तब उनका पूरा परिवार कोटद्वार आ गया था। हालांकि, अपनी पढ़ाई पूरी करने और दादी के साथ रहने के लिए अंजली गांव में ही रहीं।

उनका बचपन एक सामान्य पहाड़ी गांव की जिंदगी के बीच बीता। पढ़ाई के साथ घास काटना, लकड़ी लाना, खेतों में काम करना, गाय-बछड़ों की देखभाल और घर की जिम्मेदारियां निभाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। उस समय अंजली को बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि यही साधारण जिंदगी आगे चलकर उन्हें कला की एक अलग दुनिया तक पहुंचाएगी।

बचपन से था Painting का शौक

अंजली को बचपन से ही चित्र बनाने और Painting करने का शौक था। वह अपने मन से पेंटिंग बनाया करती थीं, लेकिन उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि कला को भी एक प्रोफेशन के रूप में अपनाया जा सकता है।

आसपास के लोगों से उन्हें अक्सर यही सुनने को मिलता था कि अगर Painting पसंद है तो Drawing Teacher बनना अच्छा विकल्प हो सकता है। इसलिए अंजली के मन में भी एक सरकारी Drawing Teacher बनने का सपना था। Professional Artist बनना उस समय उनकी सोच का हिस्सा नहीं था, क्योंकि उन्हें इस क्षेत्र में मौजूद संभावनाओं की जानकारी ही नहीं थी।

एक शिक्षक ने दिखाई नई राह

बारहवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान उनके एक शिक्षक ने उन्हें पहली बार BFA यानी Bachelor of Fine Arts के बारे में बताया। शिक्षक ने अंजली को समझाया कि वह चाहें तो कला के क्षेत्र में Professional Artist के रूप में भी अपना भविष्य बना सकती हैं। यही वह समय था जब पहली बार अंजली को महसूस हुआ कि Painting केवल शौक नहीं, बल्कि करियर भी बन सकती है। हालांकि, उनकी राह इतनी आसान नहीं थी। अंजली ने बारहवीं की पढ़ाई PCB यानी Science से की थी। परिवार उन्हें BFA की पढ़ाई के लिए बाहर भेजने के लिए तैयार नहीं था। परिवार की चिंता थी कि गांव से पढ़ी एक लड़की के लिए अकेले बाहर रहना आसान नहीं होगा। इन्हीं परिस्थितियों में अंजली ने BSc में दाखिला लिया।

BSc के एक साल ने बदल दी जिंदगी

BSc का एक साल अंजली की जिंदगी का सबसे बड़ा turning point साबित हुआ। पढ़ाई के दौरान उन्होंने खुद से सवाल किया—“मैं उस विषय की पढ़ाई क्यों कर रही हूं, जिसमें मुझे अपना future ही नहीं दिखाई देता?” इस सवाल ने उन्हें अपने फैसले पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर किया।

उन्होंने BSc छोड़ने का साहसिक फैसला लिया। शुरुआत में परिवार और आसपास के लोगों ने उनके निर्णय पर सवाल उठाए। उन्हें यह भी सुनना पड़ा कि जब वह BSc नहीं कर पाईं तो आगे शायद पढ़ाई भी पूरी न कर पाएं। लेकिन अंजली ने इस बार पीछे हटने के बजाय अपने passion को चुनने का फैसला किया।
उन्होंने हरिद्वार से BA Painting में दाखिला लिया और इसके बाद MA Painting, Intermediate Single Subject Painting और B.Ed. की पढ़ाई भी पूरी की।

पहचान बनाने के लिए शुरुआत में कम मेहनताने पर किया काम

डिग्री की पढ़ाई के साथ अंजली ने अपनी कला को बेहतर बनाने पर भी लगातार काम किया। शुरुआत में उनके पास न कोई बड़ा platform था और न ही कोई ऐसा व्यक्ति जो उन्हें बड़े अवसर दिला सके। ऐसे में उन्होंने कई Wall Paintings और Artworks बिना शुल्क या बहुत कम मेहनताने पर किए।
उनका मानना था कि शुरुआत में कमाई से ज्यादा जरूरी अपनी पहचान और काम का भरोसा बनाना है। धीरे-धीरे उनके काम को लोगों ने पसंद करना शुरू किया। लोगों का भरोसा बढ़ा और उन्हें Commission Works मिलने लगे।

2019 में मिली पहली बड़ी Professional Opportunity

अंजली की Professional Journey में साल 2019 बेहद महत्वपूर्ण रहा। इसी साल उन्हें कोटद्वार वन विभाग के लिए पहली Official Wall Painting करने का अवसर मिला। यहीं से उनके काम को एक नई दिशा मिली और इसके बाद लगातार नए अवसर उनके सामने आने लगे।
हालांकि, एक Artist के तौर पर उनके सामने एक और बड़ी चुनौती थी—Communication। गांव के माहौल से आने के कारण नए लोगों से खुलकर बात करना, अपने काम के बारे में बताना और खुद के लिए Opportunities मांगना अंजली के लिए आसान नहीं था। लेकिन उन्होंने धीरे-धीरे इस झिझक को दूर किया। लोगों से मिलना, उनसे सीखना और अपनी कला के जरिए खुद को व्यक्त करना शुरू किया। उनके लिए Art सिर्फ कमाई का जरिया नहीं बनी, बल्कि इसी कला ने उनका Confidence भी बढ़ाया।

हुनर को स्वरोजगार में बदला, 1-2 महीनों में 2-3 लाख तक की कमाई

आज अंजली अपने हुनर को सिर्फ Art तक सीमित नहीं रख रही हैं, बल्कि इसे स्वरोजगार का माध्यम भी बना चुकी हैं। अंजली के अनुसार, अपने Painting और Art Work से वह कई बार 1 से 2 महीनों में करीब 2 से 3 लाख रुपये तक की कमाई कर लेती हैं। एक पहाड़ी गांव से निकलकर अपने हुनर के दम पर खुद के लिए रोजगार खड़ा करना और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ना उनके लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है।

उत्तराखंड स्थापना दिवस से Bird Festival तक मिली पहचान

अंजली की कला को कई महत्वपूर्ण मंच भी मिले हैं। उत्तराखंड स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित Wall Painting Competition में उन्होंने प्रथम स्थान हासिल किया और विधानसभा अध्यक्ष से सम्मानित होने का अवसर मिला। उन्हें श्री सिद्धबली मंदिर परिसर में दो बार Wall Painting करने का अवसर भी मिला।
इसके अलावा Kotdwar Bird Festival 2026 उनके लिए बेहद खास रहा। इस आयोजन में उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए Live Painting बनाई, अपनी कला प्रदर्शित की और पूरे आयोजन स्थल की Wall Painting का काम किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अंजली की बनाई Painting में स्वयं भी रंग भरे। उन्होंने अंजली के काम की सराहना की और उन्हें सम्मानित भी किया। अंजली के लिए यह पल आज भी उनकी यादगार उपलब्धियों में शामिल है।
इसके अलावा कर्णाश्रम सहित विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थानों के साथ काम करने का अवसर भी उन्हें मिला। उन्होंने अलग-अलग तरह की कलाकृतियां बनाईं और उन्हें बेचकर अपने काम को आगे बढ़ाया।

Bisht Arts & Traders के जरिए मिली Professional पहचान

समय के साथ अंजली ने अपने काम को एक व्यवस्थित और Professional पहचान देने की दिशा में भी कदम बढ़ाया। उन्होंने Bisht Arts & Traders के नाम से अपनी Firm स्थापित की। इसके साथ ही उन्होंने GST और MSME Registration भी कराया। अंजली के लिए यह केवल एक Formality नहीं थी, बल्कि यह उनके उस विश्वास का हिस्सा था कि अब वह अपने हुनर को पूरी जिम्मेदारी और Professional तरीके से आगे बढ़ाना चाहती हैं।

अब सपना सिर्फ उत्तराखंड तक सीमित नहीं

आज जब अंजली अपनी Journey को पीछे मुड़कर देखती हैं, तो उन्हें खुद भी लगता है कि जिंदगी उन्हें ऐसे रास्ते पर ले आई, जिसके बारे में उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था। कभी उनका सपना सिर्फ एक सरकारी Drawing Teacher बनने का था। लेकिन परिस्थितियों, मेहनत, सीखने की इच्छा और अपने फैसले पर भरोसा रखने के कारण वह Professional Artist बनने की राह पर आगे बढ़ीं। आज उनका सपना है कि उनकी कला सिर्फ उत्तराखंड तक सीमित न रहे, बल्कि देश और दुनिया तक पहुंचे। वह चाहती हैं कि उनकी पहचान सिर्फ उनकी Paintings से नहीं, बल्कि उनके काम, व्यवहार और लगातार सीखने की कोशिशों से बने। उनका लक्ष्य एक आत्मनिर्भर महिला के रूप में अपनी अलग पहचान बनाना और अपनी मेहनत के दम पर लगातार आगे बढ़ते रहना है।

अवसर हमेशा मिलते नहीं, कई बार खुद बनाने पड़ते हैं

अंजली की कहानी सिर्फ एक Artist की सफलता की कहानी नहीं है। यह उस पहाड़ी बेटी की कहानी है, जिसने अपने हुनर को पहचाना और धीरे-धीरे उसे अपनी ताकत बना लिया। उनकी Journey यह बताती है कि सफलता के पीछे सिर्फ वह मुकाम नहीं होता जो लोगों को दिखाई देता है। उसके पीछे कई छोटे फैसले, संघर्ष, असफलताएं, डर और लगातार मेहनत छिपी होती है।

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