बरसात में पौधों की देखभाल: थोड़ी-सी सावधानी, हरियाली रहेगी सालभर: ऋतिका पयाल राणा (पर्यावरण प्रेमी)-Newsnetra
मानसून का मौसम पौधों के लिए नई ऊर्जा लेकर आता है, लेकिन लगातार बारिश, अधिक नमी और कम धूप कई बार पौधों को नुकसान भी पहुँचा सकती है। यदि इस मौसम में थोड़ी-सी देखभाल की जाए, तो घर का गार्डन पहले से कहीं अधिक हरा-भरा और आकर्षक बन सकता है।
1. पानी देने में करें समझदारी:
यदि लगातार बारिश हो रही हो तो अतिरिक्त पानी देने से बचें। गमले की मिट्टी को हाथ से छूकर देखें। मिट्टी पहले से गीली हो तो सिंचाई न करें, क्योंकि अधिक पानी जड़ों को सड़ा सकता है।
2. पीली और सूखी पत्तियाँ हटाएँ:
बारिश के मौसम में फंगस और कीट जल्दी फैलते हैं। पौधों की पीली, सूखी या संक्रमित पत्तियों को समय-समय पर हटाते रहें ताकि नया विकास बेहतर हो सके।
3. अच्छी जल निकासी रखें:
सुनिश्चित करें कि गमलों के नीचे बने छेद खुले हों। यदि पानी गमले में जमा रहेगा, तो जड़ों में सड़न और पौधे की वृद्धि रुक सकती है।
4. जैविक खाद का प्रयोग करें :
हर 15–20 दिन में वर्मी कम्पोस्ट, गोबर की सड़ी खाद या घर में बनी ऑर्गेनिक कम्पोस्ट डालें। इससे पौधों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं और उनकी बढ़वार तेज होती है।
5. कीटों से करें प्राकृतिक बचाव:
नीम के तेल का घोल या हल्का जैविक कीटनाशक 10–15 दिन के अंतराल पर छिड़कें। इससे एफिड्स, मिलीबग और फफूंद जैसी समस्याओं से बचाव होता है।
6. धूप भी है जरूरी:
लगातार बादल रहने पर पौधों को जहाँ संभव हो, कुछ घंटों की हल्की धूप अवश्य मिले। इससे पौधे स्वस्थ रहते हैं और फफूंद का खतरा कम होता है।
मानसून में लगाने योग्य पौधे
गुड़हल
गेंदा
अपराजिता
तुलसी
मोगरा
स्नेक प्लांट
मनी प्लांट
एलोवेरा
विशेष सुझाव:
बारिश के बाद यदि गमलों में पानी भर जाए तो तुरंत निकाल दें। सप्ताह में एक बार पौधों की अच्छी तरह जाँच करें ताकि किसी भी बीमारी या कीट का समय रहते पता चल सके।




