सीएम धामी का SC-ST समाज से संवाद, बोले- हर वर्ग और क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता-Newsnetra
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर दूरस्थ एवं पर्वतीय क्षेत्रों से आए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समाज के लोगों के साथ अनौपचारिक संवाद किया। टिहरी, देहरादून, उत्तरकाशी, चकराता, कालसी सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपने क्षेत्र से जुड़ी विकास संबंधी आवश्यकताओं, समस्याओं और अपेक्षाओं को रखा। मुख्यमंत्री ने सभी लोगों से आत्मीयता से संवाद करते हुए उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को उनके यथासंभव शीघ्र समाधान के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का मूल उद्देश्य उत्तराखण्ड के प्रत्येक वर्ग, प्रत्येक क्षेत्र और समाज के प्रत्येक व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। सरकार समेकित एवं समावेशी विकास के मिशन के साथ कार्य कर रही है, जिसमें समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने कहा कि इससे पूर्व भी चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समाज के लोगों के साथ संवाद के अवसर मिलते रहे हैं। इन संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों ने अपनी स्थानीय समस्याएं और आवश्यकताएं सीधे सरकार के समक्ष रखी हैं तथा उनके समाधान की दिशा में निरंतर प्रयास किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान के माध्यम से समानता, सामाजिक न्याय और प्रत्येक नागरिक को समान अवसर का जो मार्ग दिखाया, वह आज भी देश के लिए प्रेरणास्रोत है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए समाज के सभी वर्गों के सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि विकास का लाभ किसी एक वर्ग या क्षेत्र तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के सभी वर्गों को समान अवसर प्राप्त हों। वंचित एवं कमजोर वर्गों, अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति समाज के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक सशक्तिकरण के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के बजट में भी वंचित एवं दूरस्थ क्षेत्रों के विकास तथा कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक प्रभावी रूप से पहुंचे।
मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि पिछले लगभग पांच वर्षों में उन्होंने चकराता, कालसी, जौनसार-बावर क्षेत्र सहित उत्तरकाशी और राज्य के अन्य पर्वतीय एवं सीमांत जिलों के सैकड़ों भ्रमण कार्यक्रम किए हैं। मुख्यमंत्री के रूप में उनका प्रयास केवल देहरादून तक सीमित रहना नहीं रहा, बल्कि राज्य के दूरस्थ गांवों, सीमांत क्षेत्रों और पर्वतीय अंचलों में स्वयं पहुंचकर वहां की वास्तविक परिस्थितियों को समझना और स्थानीय लोगों से सीधे संवाद करना रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन और योगदान से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों को पंचतीर्थ के रूप में विकसित कर उन्हें देश की सामाजिक चेतना से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को बाबा साहेब के जीवन, संघर्ष, विचारों और संविधान निर्माण में उनके योगदान से परिचित कराना है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में भी सामाजिक एवं सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। आदि गौरव महोत्सव जैसे आयोजनों के माध्यम से जनजातीय समाज की समृद्ध परंपराओं, संस्कृति, लोककला, लोकगीत, हस्तशिल्प और जीवनशैली को व्यापक मंच प्रदान किया जा रहा है। देहरादून के साथ-साथ दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में भी ऐसे आयोजनों का विस्तार किया जा रहा है। हाल ही में चंपावत में आयोजित आदि गौरव महोत्सव के माध्यम से भी जनजातीय संस्कृति और विरासत को सम्मान देने का कार्य किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा अनुसूचित जनजाति समाज
के शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही हैं। एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, जनजातीय विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं, जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा एवं आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (PM-JANMAN) तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसी पहल जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास हैं।
उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, आवास, विद्युत, रोजगार और आजीविका के अवसरों को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उत्तराखण्ड सरकार द्वारा भी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समाज के विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे उत्तराखण्ड के पारंपरिक उत्पादों, हस्तशिल्प और स्थानीय शिल्प का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक शिल्प की देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मांग बढ़ रही है। स्वयं सहायता समूहों को बिना ब्याज ऋण जैसी सुविधाओं से जोड़कर उन्हें स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और स्थानीय अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी को और मजबूत करना है।
इस अवसर पर विधायक श्रीमती सरिता आर्या, विधायक श्री दुर्गेश्वर लाल, सचिव श्री विनय शंकर पांडेय, आईजी गढ़वाल श्री राजीव स्वरूप सहित अन्य अधिकारी तथा राज्य के विभिन्न दूरस्थ क्षेत्रों से आए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के प्रतिनिधि उपस्थित थे।






