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News Netra > ताज़ा खबर > उत्तराखंड > उत्तराखंड के 1,314 वार्डों में 100% डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, दिसंबर 2026 तक डंपसाइट रेमेडिएशन का लक्ष्य-Newsnetra
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उत्तराखंड के 1,314 वार्डों में 100% डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, दिसंबर 2026 तक डंपसाइट रेमेडिएशन का लक्ष्य-Newsnetra

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Last updated: 2026/09/10 at 8:14 PM
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उत्तराखंड के 1,314 वार्डों में 100% डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, दिसंबर 2026 तक डंपसाइट रेमेडिएशन का लक्ष्य-Newsnetra

उत्तराखंड के 1,314 वार्डों में 100 प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण

– उत्तराखंड में दिसंबर 2026 तक पुराने कचरे और डंपसाइट रेमेडिएशन में तेजी लाने का लक्ष्य

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– चारधाम एवं पर्यटन क्षेत्रों के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की विशेष योजना पर जोर: श्री प्रवीण कुमार, अपर निदेशक, शहरी विकास

बुधवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी), देहरादून द्वारा सचिवालय मीडिया सेंटर में ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन’ विषय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026, लीगेसी वेस्ट/डंपसाइट रेमेडिएशन, कचरा पृथक्करण, वायु प्रदूषण नियंत्रण और स्थानीय निकायों की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी ग

पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के साथ कचरे की मात्रा में वृद्धि हो रही है। ऐसे में वैज्ञानिक एवं डेटा-आधारित दृष्टिकोण को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के साथ जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। प्रभावी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छ वायु के लक्ष्य को केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि सामूहिक भागीदारी से हासिल किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी नए नियमों में कचरे को चार धाराओं—गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाला कचरा—में अलग करने पर जोर दिया गया है। साथ ही बल्क वेस्ट जनरेटर्स की जिम्मेदारियां बढ़ाई गई हैं और एक्सटेंडेड बल्क वेस्ट जनरेटर्स रिस्पांसिबिलिटी (EBWGR) की व्यवस्था की गई है। नियमों में कचरे के संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और निपटान की ऑनलाइन निगरानी तथा डिजिटल पंजीकरण और रिपोर्टिंग का प्रावधान है। इसका उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के साथ कचरे को संसाधन के रूप में उपयोग कर सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना है। लैंडफिल को अंतिम विकल्प के रूप में रखते हुए पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग को प्राथमिकता दी गई है।

डॉ. धकाते ने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड में 108 शहरी स्थानीय निकायों के अंतर्गत 1,314 वार्डों में 100 प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की व्यवस्था है। राज्य में लगभग 1,515 वाहन उपलब्ध हैं और अतिरिक्त वाहनों की खरीद प्रक्रिया जारी है। चार-धारा पृथक्करण के लिए नए वाहनों में चार कंपार्टमेंट की व्यवस्था की जा रही है। राज्य में 1,225 वार्डों में स्रोत पर कचरा पृथक्करण शुरू किया जा चुका है। प्रतिदिन लगभग 1,930.85 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से 1,804.59 मीट्रिक टन (93.46 प्रतिशत) का प्रतिदिन प्रसंस्करण किया जा रहा है। राज्य में 61 लीगेसी वेस्ट/डंपसाइट चिन्हित हैं। इनमें लगभग 23.34 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे में से 12.70 लाख मीट्रिक टन (54.41 प्रतिशत) का उपचार किया जा चुका है। दिसंबर 2026 तक पुराने कचरे के उपचार और डंपसाइट रेमेडिएशन में तेजी लाने का लक्ष्य है। राज्य में 85 MRF, 663 NADEP/कम्पोस्ट पिट और 87 प्लास्टिक कॉम्पैक्टर संचालित हैं तथा 1,058 बल्क वेस्ट जनरेटर्स की पहचान की गई है। कचरा संग्रहण और परिवहन की निगरानी के लिए व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम (VLTS) लागू किया जा रहा है। प्रथम चरण में सभी नगर निगमों को इसके दायरे में लाया जा रहा है।

श्री प्रवीण कुमार, अपर निदेशक, शहरी विकास ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन संबंधी निर्देशों का भी उल्लेख किया गया। न्यायालय ने अनुपालन, BWGs की जवाबदेही, डिजिटल पंजीकरण, निगरानी और अनधिकृत डंपिंग पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। भारत ‘जीरो डंपसाइट’ के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। डंपसाइट रेमेडिएशन के माध्यम से पुराने कचरे का वैज्ञानिक उपचार कर उसे सड़क निर्माण सामग्री, भरान सामग्री, रिसाइकल योग्य वस्तुओं और RDF जैसे उपयोगी संसाधनों में परिवर्तित किया जा रहा है। इससे वायु और भूजल प्रदूषण तथा डंपसाइट में आग की घटनाओं को कम करने में मदद मिलती है।

उन्होंने कहा कि मेयर, पार्षदों और अन्य जनप्रतिनिधियों से नागरिकों को स्रोत पर चार स्तरीय कचरा पृथक्करण, प्लास्टिक के जिम्मेदार उपयोग और स्वच्छता नियमों के पालन के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया गया। RWA, होटल, रेस्तरां और अन्य बल्क वेस्ट जनरेटर्स के कचरे के उचित प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई। चारधाम और अन्य पर्यटन क्षेत्रों में बढ़ती तीर्थयात्रा एवं पर्यटन गतिविधियों को देखते हुए वहां कचरा संग्रहण, पृथक्करण, परिवहन और वैज्ञानिक प्रसंस्करण की समुचित व्यवस्था के लिए विशेष योजना तैयार करने पर जोर दिया गया। स्वच्छ वायु और प्रभावी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए सरकार, स्थानीय निकायों, जनप्रतिनिधियों, संस्थानों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और नागरिकों की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है।

श्री कुमार ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों एवं द्वीपों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए विशेष प्रावधान लागू किए गए हैं। इनमें पर्यटकों से उपयोगकर्ता शुल्क वसूलना एवं उपलब्ध अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाओं के आधार पर स्थानीय निकायों द्वारा पर्यटकों के आगमन को नियंत्रित करना शामिल है। इन क्षेत्रों में गैर-बायोडिग्रेडेबल अपशिष्ट के लिए विशेष संग्रहण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। स्थानीय लोगों को अपशिष्ट स्थानीय निकायों को सौंपने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा और उन्हें कूड़ा फैलाने से रोका जाएगा। होटल और रेस्तरां एसपीसीबी या पीसीसी द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार गीले अपशिष्ट का विकेंद्रीकृत प्रसंस्करण करेंगे। नियमों में प्रभावी रूप से लागू करने के लिए केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय समितियों की स्थापना का भी प्रावधान है। राज्य स्तर पर या केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर, राज्य के मुख्य सचिव या केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के प्रमुख की अध्यक्षता वाली एक समिति केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नियमों के प्रभावी कार्यान्वयन की सिफारिश करेगी

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