आईएमए देहरादून से निकले 515 युवा अफसर, ‘अंतिम पग’ के साथ शुरू हुआ राष्ट्रसेवा का सफर-Newsnetra
आंखों में चमक और सीने में जज्बा। और तिरंगे की शपथ के साथ फर्ज का सफर शुरू हुआ। आईएमए देहरादून की परेड में राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम दिखा। आईएमए से निकले 515 युवा अफसरों ने देश सेवा की शपथ ली।
158वीं पासिंग आउट परेड में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि रहीं। सुबह 6:40 बजे शुरू हुई परेड में अनुशासन, दृढ़ संकल्प और सैन्य गौरव का ऐसा प्रदर्शन देखने को मिला, जिसने हर किसी के भीतर देशभक्ति की भावना को और प्रबल किया। कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ते कैडेट ने संदेश दिया कि देश की सुरक्षा और सम्मान के लिए वे हर चुनौती का सामना करने को तैयार हैं।
सबसे गौरवपूर्ण क्षण तब आया जब कैडेट्स ने अंतिम पग’ पार किया। वर्षों की कठिन ट्रेनिंग, पसीना, संघर्ष और सपनों की यात्रा उस एक कदम के साथ पूरी हुई।
तालियों की गड़गड़ाहट के बीच परिवारों की आंखों में गर्व के आंसू छलक आए। यह सिर्फ एक सैन्य परंपरा नहीं, बल्कि देश के लिए सर्वस्व समर्पित करने की शपथ का प्रतीक था।
हेलिकॉप्टर से कैडेट्स पर पुष्पवर्षा की गई। आसमान में उड़ते हेलिकॉप्टरों ने भारतीय तिरंगा, सेना का ध्वज और आईएमए का ध्वज लेकर फ्लाईपास्ट किया। पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग गया।
हर नजर तिरंगे पर थी और हर दिल में देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा। इस परेड ने इतिहास भी रचा। पहली बार आईएमए से प्रशिक्षित नौ महिला सैन्य अफसर भारतीय सेना में शामिल हुईं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी अपने संबोधन में इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि आईएमए केवल सैन्य कौशल ही नहीं, बल्कि दया, करुणा और मानवीय मूल्यों की भी शिक्षा देता है।
कुल 515 कैडेट्स में 481 भारतीय और 16 मित्र देशों के 34 कैडेट शामिल रहे। परेड के बाद आयोजित पीपिंग सेरेमनी में नव नियुक्त अधिकारियों के कंधों पर रैंक सजाई गई।
स्वॉर्ड ऑफ ऑनर विशाल कुमार को मिला, जबकि अन्य उत्कृष्ट कैडेट्स को भी सम्मानित किया गया
आईएमए परेड में देशभक्ति, त्याग और राष्ट्रसेवा के उस भाव की झलक थी, जो हर भारतीय सैनिक के दिल में धड़कता है





