रुड़की के रामनगर डाइट में आठ दिवसीय पुस्तक मेला संपन्न; साहित्य और ज्ञान के प्रति दिखा पाठकों का भारी उत्साह-Newsnetra
रुड़की (विशेष संवाददाता): उत्तराखंड के रुड़की स्थित रामनगर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) परिसर में नेशनल बुक ट्रस्ट (NBT), भारत सरकार द्वारा आयोजित आठ दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी का भव्य समापन हुआ। 25 जुलाई से शुरू होकर 2 अगस्त तक चली इस प्रदर्शनी ने क्षेत्र के पुस्तक प्रेमियों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के बीच एक नई ऊर्जा का संचार किया है।



ज्ञान और पठन संस्कृति का अनूठा संगम
इस पुस्तक प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा देना और आम जनमानस तक किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण साहित्य उपलब्ध कराना था। प्रदर्शनी के दौरान विभिन्न विषयों—जैसे बाल साहित्य, विज्ञान, इतिहास, विश्व साहित्य, जीवनी, कला-संस्कृति और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी अध्ययन सामग्री—पर आधारित ढेरों पुस्तकों का प्रदर्शन किया गया।
पाठकों का उमड़ा हुजूम, हर आयु वर्ग की दिखी सहभागिता
आयोजन के पहले दिन से ही प्रदर्शनी स्थल पर पाठकों की निरंतर आवाजाही बनी रही। 25 जुलाई से लेकर 2 अगस्त तक चले इस आयोजन में केवल रुड़की शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
- छात्रों और युवाओं में उत्साह: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और स्कूली बच्चों ने अपनी पसंद की पुस्तकों का चयन किया और उनका आनंद लिया।
- शिक्षकों एवं अभिभावकों की उपस्थिति: डाइट (DIET) परिसर में आयोजन होने के कारण स्थानीय शिक्षकों, शिक्षाविदों और अभिभावकों ने भी बच्चों को अच्छी पुस्तकें दिलाने में गहरी रुचि दिखाई।
आयोजन टीम (NBT) का वक्तव्य
नेशनल बुक ट्रस्ट (NBT) की आयोजन टीम ने इस सफल आयोजन पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा:
“रुड़की में पाठकों से मिला यह प्रतिसाद बेहद उत्साहजनक है। डिजिटल दौर के बावजूद जिस तरह से लोगों, विशेषकर युवाओं और बच्चों ने भौतिक रूप से किताबों को देखने, पढ़ने और खरीदने में रुचि दिखाई है, वह यह साबित करता है कि अच्छी किताबों का महत्व आज भी अक्षुण्ण है।”
भविष्य के आयोजनों की मांग
रामनगर डाइट परिसर में आयोजित इस पुस्तक प्रदर्शनी ने न केवल पाठकों को पसंदीदा किताबें चुनने का अवसर दिया, बल्कि स्थानीय स्तर पर बौद्धिक और साहित्यिक वातावरण को मजबूत किया। समापन अवसर पर स्थानीय निवासियों और शिक्षकों ने एनबीटी से मांग की कि ऐसे साहित्यिक और शैक्षणिक आयोजनों को भविष्य में भी नियमित रूप से आयोजित किया जाना चाहिए।





