आमवात यानी गठिया: बदलती जीवनशैली से बढ़ रहा रोग, जानें कारण, लक्षण और खानपान — डॉ. शक्ति मोहन बिजल्वाण-Newsnetra
आम वात (Rheumatoid Arthritis) / “गठिया”
जैसे-जैसे कलयुग का दौर चल रहा है लोगों का खानपान रहन-सहन सब दिन प्रतिदिन बदल रहा है। लोग शारीरिक श्रम कम करने लगे हैं और मानसिक श्रम ज्यादा करने लगे हैं। खाना पीना high calorie का लिया जा रहा है जिसे आम वात (Rheumatoid Arthritis) के case आजकल बहुत ज्यादा बढ़ रहे हैं।
पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में यह रोग ज्यादा देखने को मिलता है।
- हर रोगी को आम वात (RA) का रोगी नहीं समझना चाहिए।
- कभी वह आमवात + वातरक होता है।
- कभी वह सन्धिगत वात + आम वात होता है।
- कभी वह सन्धिगत वात + वातरक होता है।
या अन्य कोई व्याधि होती है।
उसी हिसाब से हमें समझना चाहिए।
प्रायः आम वात रोग (RA) का पता चलते ही फौरन इलाज शुरू कर देना चाहिए क्योंकि देरी हो जाने पर धीरे-धीरे रोग कष्ट साध्य/असाध्य हो जाता है।
अग्नि के मंद हो जाने पर खाया हुआ आहार पचता नहीं है वह कच्चा-कच्चा ही रहता है जिससे शरीर में आम (Toxin) की उत्पत्ति होती रहती है। आम एक विषवत पदार्थ है जो शरीर को नुकसान पहुंचाता है। शरीर की वायु अगर normal है तो वह शरीर के लिए बहुत अच्छा काम करती है लेकिन अगर वात प्रकोपक आहार विहार का सेवन किया जाए तो वह वायु आम के साथ मिलकर आम वात व्याधि (Rheumatoid Arthritis) को उत्पन्न करती है।
आयुर्वेद ग्रंथों में मानव निदान में आम वात का विस्तृत वर्णन मिलता है। आमवात व्याधि बहुत ही गंभीर बीमारी है। आगे चलकर यह RHD (Rheumatic Heart Disease) तक पैदा हो जाती है।

कारणों को समझना जरूरी है
- सामान्यतः घी शरीर के लिए लाभदायक होता है मगर मंदाग्नि में घी का अतिप्रमाण में सेवन करने से
- अग्नि व ग्रहणी की दुष्टि होने से
- विरुद्ध अन्नपान — चाय + पराठा
- विरुद्ध चेष्टा — खाना खाते ही Work out करना
- अतिस्निग्ध पदार्थ — पकोड़ा, पूरी, तैलीय पदार्थों का सेवन करना
- गरिष्ठ पदार्थों का सेवन करना
- भूख नहीं होने पर भी भरपूर भोजन करना
- रात को अधिक देर तक जागना
- दिन में सोना
- मानसिक कारण
- शीतल पदार्थ — Ice cream, Cold drink, बासी भोजन, Freeze में रखे भोज्य पदार्थों का सेवन
लक्षणों को कैसे पहचानें
आमवात (RA) के किसी भी रोगी में ज्वर का इतिहास जरूर मिलता है—चाहे वह Malarial fever, Viral fever, Typhoid fever आदि किसी भी तरह का ज्वर रहता ही है।
Modern Science की Antipyretic drug, Vasodilation करके पसीना तो निकाल देती है जिससे ज्वर का ताप कम हो जाता है मगर ज्वर ठीक नहीं होता है।
- पूरे शरीर में भारीपन रहता है, थोड़ा सा भी काम करने पर शरीर में थकान हो जाती है।
- सन्धियों में अकड़न सी रहती है, सन्धियां मुड़ नहीं पाती हैं।
- शरीर में आम (Toxin) के अधिक बढ़ जाने पर भोजन करने का मन नहीं करता है।
- रस धातु (Digestive juice) अच्छे से नहीं बनने पर शरीर को पोषण नहीं मिल पाता है जिससे Pain होता है।
- रोगी को बहुत ज्यादा प्यास लगती है। रोगी जितना ज्यादा पानी पीता है शरीर में उतना ही भारीपन होता है जिससे आलस्य बढ़ जाता है।
- शरीर में अंगमर्द के समान पीड़ा होती है, ऐसा लगता है मानो किसी ने शरीर को मरोड़ के रख दिया हो।
- उल्टी आने का मन करता है।
- सन्धियों में बिच्छू के काटने के समान वेदना होती है।
- बहुत ज्यादा रोग के बढ़ जाने पर भयानक कष्ट उत्पन्न होने लगता है—“हाथ, पैर, सिर, कमर, (Knee joints), (Elbow joints), (Thigh joints), (Pelvic joints) सभी जगह वेदना युक्त शोथ होता है।”
- कमर पूरी तरह से अकड़ जाती है, रोगी थोड़ा सा भी हिलने पर असहनीय पीड़ा के कारण चीखने-चिल्लाने लगता है।
- दिमाग पर Negativity हावी हो जाती है, उसे अपना जीवन बेकार लगने लगता है।
- महिलाएं जो समय पर खाना नहीं खाती हैं, जिह्वा पर संयम नहीं रखती हैं, प्रायः ऐसी महिलाओं में आमवात (RA) की व्याधि बहुतायत में देखने को मिलती है।
- हृदय में आम (Toxin) के संचय से RHD (Rheumatic Heart disease) हो जाती है जिससे Heart में Pain, सुन्नता, रक्तचाप, हृदय दौर्बल्य हो जाता है।
- मलावरोध (Constipation) — पुरीष अच्छे से नहीं निकल पाता है या फिर साम मल (Faecal matter with Toxin) की प्रवृत्ति होती है।
- आमवात अधिक पुराना हो जाने पर Degenerative changes आने लगते हैं, सन्धियों को damage करने लगता है, धीरे-धीरे Permanent deformity हो जाती है।
नोट
प्रायः बरसात में जब ठंडी हवाएं चलती हैं, ठण्ड के मौसम में, AC के वातावरण में रहने से यह बढ़ जाता है।
आमवात (RA) होने पर क्या खाएं
- करेले, परवल की सब्जी
- साठी चावल (लाल चावल)
- अदरक का सेवन
- काली मिर्च का सेवन
- खाने में जीरा, अजवाइन का प्रयोग करें
- लहसुन का प्रयोग करें
- तक्र (छाछ) का प्रयोग
- उष्ण जल का सेवन
एक बार का किया हुआ भोजन पच जाने के बाद ही, शुद्ध डकार आ जाने पर ही दुबारा भोजन करना चाहिए।
छोटी अवस्था में या बच्चों में भी पाया जाता है।
सुकुमार लोग जो आनंदपूर्वक जीवन जीते हैं उनमें अधिक पाया जाता है।
लक्षणों के बढ़ जाने पर Modern Science में RA factor करवाते हैं। RA factor (+ive) आने पर आमवात (RA) का रोगी माना जाता है मगर यह जरूरी नहीं है। कई Case में देखा जाता है कि उनमें RA factor (-ive) होने के बाद भी उनमें RA (आमवात) के लक्षण दिखाई देते हैं, इसे आयुर्वेद में रोग की व्यक्तावस्था कहा जाता है।
आयुर्वेद की चिकित्सा द्वारा पूरे Body के System को अच्छा किया जाता है। रोगी की अग्नि को अच्छा किया जाता है, वायु का अनुलोमन किया जाता है, दीपन पाचन कर के हृदय को बल देने वाली औषधियां दी जाती हैं।
रोगी को प्रारंभ में analysis करके हेतु (cause), सम्प्राप्ति (Pathogenesis) करके अंशांश कल्पना से दोषों को देखा जाता है। जिस दोष का जो गुण बढ़ा होता है उसके अनुसार ही युक्ति प्रमाण का प्रयोग करके Drug of Choice की जाती है।
डॉ. शक्ति मोहन बिजल्वाण
B.Sc. B.A.M.S. ANT.
पतंजलि चिकित्सालय
मुलाना (अम्बाला)








