हरिद्वार शहर में कांग्रेस का चेहरा बन सकते हैं अनिल भास्कर? संगठन से सड़क तक लंबा सफर, 2027 पर नजर-Newsnetra
- हरिद्वार शहर से कांग्रेस की मजबूत दावेदारी क्यों बन सकते हैं अनिल भास्कर?
- संगठन से सड़क तक लंबा राजनीतिक सफर, 2022 में भी मांगा था टिकट; नई प्रदेश कार्यकारिणी में महासचिव की जिम्मेदारी ने बढ़ाया राजनीतिक कद
हरिद्वार | 26 अगस्त 2026 | न्यूज नेत्र राजनीतिक विश्लेषण
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ हरिद्वार शहर विधानसभा सीट संख्या-25 पर भी राजनीतिक सरगर्मियां धीरे-धीरे तेज होने लगी हैं। भाजपा की ओर से लंबे समय से इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे मदन कौशिक एक स्थापित चेहरा हैं, तो कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह होगा कि वह उनके मुकाबले किस ऐसे उम्मीदवार को मैदान में उतारे जो संगठन को साथ लेकर चलने के साथ-साथ हरिद्वार के स्थानीय मुद्दों, व्यापारियों, युवाओं और आम नागरिकों के बीच अपनी राजनीतिक पहचान भी रखता हो।

इसी चर्चा में कांग्रेस नेता अनिल भास्कर का नाम महत्वपूर्ण होता दिखाई देता है। उनकी दावेदारी को केवल आगामी चुनाव की आकांक्षा के रूप में देखना शायद उनके राजनीतिक सफर का अधूरा आकलन होगा। उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड बताते हैं कि वे वर्षों से कांग्रेस की स्थानीय और प्रदेश स्तरीय गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं और इससे पहले भी हरिद्वार शहर विधानसभा सीट से टिकट की औपचारिक दावेदारी कर चुके हैं।
2022 में भी हरिद्वार शहर से टिकट के दावेदार थे भास्कर
अनिल भास्कर की विधानसभा दावेदारी कोई नई बात नहीं है। वर्ष 2021 के आखिर में जब कांग्रेस ने 2022 विधानसभा चुनाव के प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया शुरू की थी, तब हरिद्वार शहर सीट से टिकट मांगने वाले आठ नेताओं में अनिल भास्कर का नाम भी शामिल था। कांग्रेस की स्क्रीनिंग प्रक्रिया तक उनकी दावेदारी पहुंची थी। आखिरकार पार्टी ने उस चुनाव में सतपाल ब्रह्मचारी को प्रत्याशी बनाया, लेकिन भास्कर का टिकट मांगना यह दर्शाता है कि हरिद्वार शहर को लेकर उनकी राजनीतिक तैयारी और इच्छा पहले से रही है।
इससे भी पहले वे पार्टी संगठन में जिम्मेदारियां निभाते दिखाई देते हैं। जून 2021 में कांग्रेस की विधानसभा स्तरीय संगठनात्मक बैठकों में उन्हें पीसीसी सदस्य के रूप में दर्ज किया गया था। उस समय हरिद्वार सहित पांच विधानसभा क्षेत्रों के लिए नियुक्त एआईसीसी कोऑर्डिनेटर की बैठकों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही।
युवा और जनमुद्दों की राजनीति से बनाई पहचान
अनिल भास्कर की राजनीतिक सक्रियता केवल पार्टी की बैठकों तक सीमित नहीं रही। रोजगार, महंगाई, सड़क, स्थानीय युवाओं के अधिकार और सरकारी भर्तियों जैसे मुद्दों पर भी वे सार्वजनिक आंदोलनों में दिखाई देते रहे हैं।
करीब छह वर्ष पहले युवा कांग्रेस के एक कार्यक्रम में तत्कालीन पूर्व प्रदेश सचिव अनिल भास्कर ने संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने, सिडकुल में स्थानीय युवाओं को रोजगार दिलाने और सड़क सहित जनसमस्याओं को लेकर अभियान चलाने की बात कही थी।
2022 में महंगाई के खिलाफ कांग्रेस के प्रदर्शन में उन्हें प्रदेश सचिव के रूप में उद्धृत किया गया, जबकि उसी वर्ष UKSSSC भर्ती प्रकरण को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन में वे प्रदेश महासचिव की भूमिका में सरकार के खिलाफ मुखर दिखाई दिए।
यह राजनीतिक निरंतरता उनकी दावेदारी के पक्ष में एक महत्वपूर्ण पहलू हो सकती है। विधानसभा का प्रत्याशी केवल चुनाव के कुछ महीने पहले सक्रिय होने वाला नेता न होकर ऐसा व्यक्ति भी होना चाहिए जिसके पास वर्षों के आंदोलन, संगठन और स्थानीय संपर्क का रिकॉर्ड हो। इस कसौटी पर भास्कर की राजनीतिक यात्रा पर कांग्रेस नेतृत्व की नजर स्वाभाविक रूप से पड़ सकती है।
हरिद्वार कॉरिडोर मुद्दे पर सामने आया आक्रामक स्थानीय चेहरा
हाल के वर्षों में अनिल भास्कर की सबसे उल्लेखनीय राजनीतिक सक्रियताओं में हरिद्वार कॉरिडोर का मुद्दा रहा है।
2024 में कांग्रेस ने “कॉरिडोर हटाओ–हरिद्वार बचाओ” जन-जागरण अभियान चलाया। इस अभियान में अनिल भास्कर न केवल प्रदेश महासचिव के रूप में सक्रिय रहे बल्कि कई कार्यक्रमों में कार्यक्रम संयोजक की जिम्मेदारी भी निभाते दिखाई दिए। यात्रा के दौरान कांग्रेस ने बाजार, व्यापारियों, संभावित विस्थापन, मुआवजे और हरिद्वार के धार्मिक स्वरूप से जुड़े सवाल उठाए। भास्कर स्वयं भी इन मुद्दों पर लगातार मुखर रहे।
हरिद्वार शहर की राजनीति में यह विषय विशेष महत्व रखता है क्योंकि यहां व्यापार, तीर्थाटन, धार्मिक संस्थाएं और स्थानीय बाजार राजनीतिक समीकरणों का बड़ा हिस्सा हैं। ऐसे में किसी नेता का इन मुद्दों पर लगातार मौजूद रहना उसे विधानसभा स्तर पर राजनीतिक पहचान प्रदान कर सकता है।
2026 में भी संगठन से जुड़े, नई प्रदेश टीम में मिला बड़ा दायित्व
2027 की दावेदारी के संदर्भ में अनिल भास्कर के पक्ष का शायद सबसे महत्वपूर्ण ताजा राजनीतिक संकेत 7 अगस्त 2026 को घोषित उत्तराखंड कांग्रेस की नई प्रदेश कार्यकारिणी है।
कांग्रेस की नई प्रदेश टीम में अनिल भास्कर को प्रदेश महासचिव बनाया गया है। विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले प्रदेश संगठन में महासचिव की जिम्मेदारी मिलना उनके राजनीतिक महत्व और संगठन के भीतर स्वीकार्यता का संकेत माना जा सकता है।
इससे पहले मई 2026 में हरिद्वार में आयोजित कांग्रेस कार्यकर्ता बैठक तथा जून 2026 में हरिद्वार विधानसभा-25 के बीएलए-2 प्रशिक्षण कार्यक्रम में भी उनकी मौजूदगी दर्ज हुई। यानी 2022 में टिकट न मिलने के बाद वे राजनीतिक रूप से निष्क्रिय नहीं हुए बल्कि संगठनात्मक गतिविधियों में बने रहे।
कांग्रेस के लिए क्यों उपयोगी हो सकता है उनका नाम?
हरिद्वार शहर सीट पर कांग्रेस के लिए चुनौती सामान्य नहीं है। पार्टी को यहां ऐसे चेहरे की आवश्यकता होगी जो भाजपा के स्थापित संगठन और लंबे समय से विधायक मदन कौशिक के चुनावी अनुभव का मुकाबला कर सके।





