गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग तेज, 15 करोड़ लोगों के हस्ताक्षर सरकार को सौंपे; 18 दिसंबर को 31 करोड़ हस्ताक्षर सौंपने का लक्ष्य- Newsnetra
गौ सम्मान आह्वान अभियान के तहत आयोजित संत सम्मेलन में गौमाता की रक्षा, सुरक्षा, संरक्षण और सम्मान को लेकर संतों एवं गौभक्तों ने बुलंद की आवाज। गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने के साथ अलग से गौ मंत्रालय बनाने की भी उठी मांग।
अग्रवाल धर्मशाला में आयोजित गौ सम्मान आह्वान अभियान के संत सम्मेलन में गौमाता की रक्षा, सुरक्षा, संरक्षण और सम्मान को लेकर महत्वपूर्ण विचार रखे गए। सम्मेलन में गौवत्सल संत श्री गोपालानंद सरस्वती जी ने अभियान की अब तक की यात्रा और आगामी योजनाओं की जानकारी साझा की।

संत श्री गोपालानंद सरस्वती जी पिछले 11 महीनों से लगातार भ्रमण कर रहे हैं और देशभर में लोगों से गौमाता की रक्षा एवं संरक्षण के इस अभियान से जुड़ने की अपील कर रहे हैं। अभियान का प्रमुख उद्देश्य गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाना और उनके संरक्षण के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
अभियान के तहत अब तक 15 करोड़ लोगों के हस्ताक्षर एकत्रित कर सरकार को सौंपे जा चुके हैं। वहीं, आगामी तीसरे चरण में 18 दिसंबर को 31 करोड़ लोगों के हस्ताक्षर सरकार को सौंपने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके माध्यम से सरकार के समक्ष गौमाता की सुरक्षा, संरक्षण और सम्मान सुनिश्चित करने की मांग प्रमुखता से रखी जाएगी।
सम्मेलन में गौमाता के संरक्षण के लिए अलग से गौ मंत्रालय के गठन की मांग भी उठाई गई, ताकि गौवंश की सुरक्षा, संवर्धन और कल्याण के लिए प्रभावी नीतियां बनाई जा सकें।
इस अवसर पर भजन गायक श्री ब्रजेश शुक्ला जी ने गौमाता की महिमा में भजनों की प्रस्तुति दी। साथ ही उन्होंने उत्तराखंड में भी गौमाता को राज्यमाता घोषित करने की मांग उठाई। उन्होंने गौसेवा और गौसंरक्षण के लिए आमजन से अभियान में अधिक से अधिक संख्या में जुड़ने की अपील की।
वहीं, टपकेश्वर महादेव मंदिर के महंत श्री श्री 108 कृष्ण गिरि महाराज ने भी सम्मेलन में अपने विचार रखे और गौमाता के सम्मान एवं संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला।
सम्मेलन में आचार्य विपिन जोशी जी एवं श्री संजय गर्ग जी के कुशल प्रबंधन में बड़ी संख्या में गौभक्तों और गौप्रेमियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के माध्यम से गौमाता की रक्षा, सुरक्षा, संरक्षण और सम्मान के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया गया।
अभियान की प्रमुख मांगें:
- गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिया जाए।
- उत्तराखंड में गौमाता को राज्यमाता घोषित किया जाए।
- गौमाता की सुरक्षा और संरक्षण के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।
- गौवंश के कल्याण के लिए अलग से गौ मंत्रालय का गठन किया जाए।
- 18 दिसंबर को तीसरे चरण में 31 करोड़ लोगों के हस्ताक्षर सरकार को सौंपे जाएं।
सम्मेलन का संदेश स्पष्ट रहा कि गौमाता की रक्षा, सुरक्षा, संरक्षण और सम्मान के लिए समाज के साथ-साथ सरकार को भी प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
जय गौमाता! जय श्रीराम!
जय गौमाता! जय श्रीराम!







