हरेला पर्व पर लगाएँ औषधीय पौधे, पर्यावरण संरक्षण के साथ स्वस्थ उत्तराखंड का भी लें संकल्प : डॉ. जे. एन. नौटियाल-Newsnetra


डॉ. जे. एन. नौटियाल
अध्यक्ष, भारतीय चिकित्सा परिषद, उत्तराखंड सरकार
हरेला उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और प्रकृति संरक्षण का प्रतीक पर्व है। यह पर्व हमें हरियाली बढ़ाने, पर्यावरण को संरक्षित करने तथा प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर औषधीय पौधों का रोपण न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह स्वस्थ समाज के निर्माण में भी अत्यंत उपयोगी है।




तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा, एलोवेरा (घृतकुमारी), नीम, आंवला, शतावरी, ब्राह्मी, कालमेघ तथा पुदीना जैसे औषधीय पौधे हमारे आसपास के वातावरण को शुद्ध करने के साथ-साथ अनेक रोगों की रोकथाम और स्वास्थ्य संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन पौधों का संरक्षण हमारी समृद्ध आयुर्वेदिक परंपरा को भी आगे बढ़ाता है।
आज जब प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं, तब प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह हरेला पर्व पर कम से कम एक औषधीय पौधा अवश्य लगाए और उसकी नियमित देखभाल का संकल्प भी ले। यदि प्रत्येक परिवार अपने घर, आँगन, विद्यालय, कार्यालय अथवा सार्वजनिक स्थान पर औषधीय पौधे लगाए, तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ पर्यावरण और बेहतर स्वास्थ्य दोनों का लाभ मिलेगा।
आइए, इस हरेला पर्व पर हम सभी “एक व्यक्ति–एक औषधीय पौधा” लगाने का संकल्प लें और पर्यावरण संरक्षण के साथ स्वस्थ उत्तराखंड एवं स्वस्थ भारत के निर्माण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।





