राष्ट्रीय विधि विवि पर सियासत तेज: धरने में पहुंचे हरक सिंह रावत, बोले—‘यह लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई’-Newsnetra
हरक सिंह रावत ने कहा कि 22 अप्रैल 2019 में रानीपोखरी में विधि विवि स्वीकृत की गई थी। जिसका शिलान्यास क्षेत्रीय विधायक और तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा किया गया था। दुर्भाग्य से करीब छह वर्ष बाद भी इसका काम शुरू नहीं किया जा सका है।
रानीपोखरी में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की मांग के लिए 37 दिनों से धरने पर बैठे ग्रामीणों के बीच मंगलवार को कांग्रेस के प्रदेश चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत पहुंचे और उनके आंदोलन को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि विधि विवि की लड़ाई लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई है।
कहा कि 22 अप्रैल 2019 में रानीपोखरी में विधि विवि स्वीकृत की गई थी। जिसका शिलान्यास क्षेत्रीय विधायक और तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा किया गया था। दुर्भाग्य से करीब छह वर्ष बाद भी इसका काम शुरू नहीं किया जा सका है। यह पहला मामला है जब किसी संस्था के लिए नोटिफिकेशन, जमीन अधिग्रहण और शिलान्यास करने के बावजूद उसका काम एक इंच भी आगे नहीं बढ़ा है। यह लड़ाई सिर्फ डोईवाला की लड़ाई नहीं, यह पूरे प्रदेश के लिए लड़ाई है। यह लोकतंत्र की हत्या है।
जब वह कृषि मंत्री थे तो उन्होंने लालतप्पड़ में फूड प्रोसेसिंग विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया था। उसका भवन बनाकर पद भी सृजित किए गए थे लेकिन वहां आज तक कक्षाएं शुरू नहीं हो पाई हैं। पूर्व काबीना मंत्री शुरवीर सिंह सजवाण ने कहा कि क्षेत्रीय विधायक, सांसद और मुख्यमंत्री भाजपा के हैं।
इसके बावजूद विधि विवि न बनना क्षेत्रवासियों के साथ अन्याय है। इस मौके पर प्रधान सुधीर रतूड़ी, पंकज यादव, मोहित उनियाल, महेंद्र भट्ट, अनूप चौहान, पुष्पराज बहुगुणा, चांद खान आदि उपस्थित रहे।
हारने के लिए बनाए गए हैं मंत्री
नवनियुक्त मत्रियों के बारे में हरक सिंह ने कहा कि जब चार-साढ़े साल में कुछ नहीं हुआ तो चुनावी वर्ष में क्या होगा। चुनावी वर्ष में खुश करने के लिए मंत्री बनाए गए हैं। यह एक रिकॉर्ड है कि जो भी अंतिम वर्ष में मंत्री बनते हैं, वो चुनाव हार जाते हैं क्योंकि वह अंतिम वर्ष में कुछ खास नहीं कर पाते हैं। श्रीनगर में मेडिकल कॉलेज तिवारी सरकार में उनके द्वारा बनाया गया था जो आज सिर्फ रेफर सेंटर बनकर रहा गया है। उन्होंने एमडीडीए पर भी लोगों को परेशान करने और नियमों के विपरीत काम करने का आरोप लगाया





