नंदानगर की घटना ने फिर झकझोरा: आखिर हमारे किशोर बच्चों को सबसे ज्यादा जरूरत किस चीज़ की है—डांट की या संवाद की?-Newsnetra
चमोली सहित पहाड़ी जिलों में पिछले कुछ समय में किशोरावस्था के विद्यार्थियों से जुड़ी दुखद घटनाएं सामने आई हैं। नंदानगर की हालिया घटना ने एक बार फिर हमें सोचने पर मजबूर किया है। जानकारी के मुताबिक कक्षा 11 और 12 वीं में पढ़ने वाले लड़के और लड़की के बीच भावनात्मक लगाव था।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार 15-18 वर्ष की आयु में भावनात्मक बदलाव तेज होते हैं, लेकिन सही-गलत के निर्णय लेने की क्षमता अभी विकसित हो रही होती है। ऐसे में डांटने से ज्यादा सुनने की जरूरत होती है।
कई बार बच्चे अपनी बात परिजनों से नहीं कह पाते और खुद को अकेला महसूस करते हैं। यह समय है जब माता-पिता, शिक्षक और समाज को एक दोस्त की तरह उनके साथ खड़ा होना होगा।
किसी भी घटना को सिर्फ एक कारण से जोड़ देना जल्दबाजी होगी। पुलिस जांच जारी है, लेकिन यह स्पष्ट है कि हमें अपने बच्चों के साथ खुला संवाद, मोबाइल के सही उपयोग और मानसिक स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान देना होगा।
आइए, हम अपने गांव-समाज में बच्चों के लिए एक सुरक्षित माहौल बनाएं जहाँ वे बिना डरे अपनी बात कह सकें।
यदि आपके आसपास कोई किशोर तनाव, उदासी या अकेलेपन से गुजर रहा है तो कृपया उससे बात करें, उसे सुनें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ सहायता लें।
राष्ट्रीय किशोर हेल्पलाइन: 1800-599-0019 / 14417
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