यह एक प्रभावशाली राजनीतिक शीर्षक है: गढ़वाल में चुनावी संग्राम तेज: कांग्रेस तलाश रही जमीन, भाजपा इतिहास दोहराने की तैयारी में-Newsnetra
आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर एक ओर जहां कांग्रेस पहाड़ में अपनी जमीन तलाशने में जुटी है तो वहीं भाजपा गढ़वाल में फिर इतिहास दोहराने की कवायद में लग गई है। खास बात यह है कि कांग्रेस और भाजपा के दोनों नेताओं के दौरे भी एक साथ पर्वतीय जिलों में हो रहे हैं
वर्तमान में कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा गढ़वाल दौरे पर हैं। वह बदरी-केदार के दर्शन करने के साथ ही पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली और टिहरी में पार्टी की जिला कार्यकारिणी की बैठक ले रही हैं। इस दौरान वह कार्यकर्ताओं में जोश भरने के साथ ही एक विपक्ष के तौर पर मुद्दों को धार देने के तरीके सुझा रही हैं, जिससे अगले चुनाव में कांग्रेस की जीत सुनिश्चित हो सके।
इधर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट भी इन दिनों गढ़वाल के दौरे पर हैं। उनका दौरा भी पौड़ी से शुरू होकर रुद्रप्रयाग, चमोली होते हुए जोशीमठ के सुदूर क्षेत्रों तक हुआ है। इस दौरान उन्होंने चुनाव प्रबंधन से जुड़े विषयों पर कार्यकर्ताओं से बात की है।
भट्ट का जोर इस बात पर है कि गढ़वाल मंडल में 2022 के चुनाव में जो भाजपा का प्रदर्शन था, इस बार उसमें और ऐतिहासिक उछाल दर्ज किया जाए। इसके लिए पार्टी के अन्य नेता भी जल्द ही गढ़वाल के सुदूर बूथों तक का दौरा करने वाले हैं।
गढ़वाल में 41 में से 29 भाजपा को, आठ सीटें ही थी कांग्रेस की
2022 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो गढ़वाल मंडल में 41 सीटें हैं, जिनमें से 29 पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। आठ सीटें ही कांग्रेस के हाथों में आईं थी। चार सीटें बसपा व निर्दलीयों को मिलीं थीं। जिलावार देखें तो सात में से तीन जिलों उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और पौड़ी में तो कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। केवल चमोली, टिहरी, देहरादून में एक-एक और हरिद्वार जिले में पांच सीटें कांग्रेस को मिलीं थीं





