सूक्ष्म से विराट तक की यात्रा! क्या ध्यान से खुल सकते हैं ब्रह्मांड के रहस्य ? -Newsnetra
“विराट”
अपने मन और मस्तिष्क को पूर्णतः शांत रखते हुये, विचार शुन्यता को प्राप्त करते हुये, किसी एक बिन्दू पर पूर्ण एकाग्रता प्राप्त करना ही ध्यान की विधा है। यह बिन्दू ही सृष्टि में अद्वैत के साक्षत्कार का वह द्वार है, जो आपको भौतिक जगत से दूर ले जाकर आध्यत्मिक यात्रा के साथ सृष्टि के लगभग 96 प्रतिशत सुक्ष्म जगत की यात्रा पर भी ले जा सकने में सक्षम है। और बिना किसी ब्राहॄय यंत्र के सहयोग से सुक्ष्म से सुक्ष्म परमाणुओं के रहस्यों में विचरण कराये जाने का मार्ग प्रशस्त करा सकती है। जितना ही हम सुक्ष्म में उतरने का प्रयत्न करेंगें, उतना ही हम अपने को विराट के निकट पायेंगें।
ब्रह्मांड के समस्त दृश्यमान भौतिक स्वरूप सुक्ष्म जगत का ही उन्नत एवं संघटित रूप है, जो कि उर्जा के न्युनतम तांरगिक अवस्था से परिवर्तित हो कर उर्जा की ही उच्चतम ठोस अवस्था को प्राप्त होता है। और वहीं अपनी पूर्ण एकाग्रता को इसके निरंतर बढते और घटते क्रम की अंतिम इकाई में पाकर हम अपने को विराट के निकट ही खड़ा पाते हैं। यानि की विराट तक की यात्रा का मार्ग वर्तुल ही होगा। अतः शायद विज्ञान का मार्ग भौतिक अवस्थाओं में उर्जा के विभिन्न क्रमपरिवर्तन एवं संयोजन के साथ ही उस विराट की खोज होगी, इसी प्रकार आध्यात्म का मार्ग भी ध्यान विधा से पूर्ण एकाग्रता को प्राप्त कर जागृत दृष्टा भाव के साथ उर्जा के सुक्षतम स्तरों तक पहुंच बनाकर कर अंततः विराट ही होगी। यानि की वैज्ञानिक दृष्टिकोण को ब्राह्यमुखी होकर भी, यात्रा का अंतिम पड़ाव भी गहनतम आध्यात्मिक सत्य (जोकि अंतर्मुखी होकर प्राप्त किये गये होंगें), का उजागर करना ही होगा।
स्मृति में रखने हेतू कुछ ज्ञात बिन्दु :
🔆 एक परमाणु में 200 टी0एन0टी0 उर्जा।
🔆हिरोशीमा और नागाशाकी में गिरे परमाणु बम की उर्जा 15 टी0एन0टी0।
🔆उर्जा और परमाणुओं के बीच छोटे-छोटे अणु हैं जिन्हें हम देव एवं देवीयां कहते हैं।
🔆हिंग्स बुसान कण व क्वार्क : दो अप क्वार्क एवं एक डाउन क्वार्क को न्युट्रान कहते है। एक अप क्वार्क एव दो डाउन क्वार्क को प्रोटान कहते है।
🔆अप क्वार्क और डाउन क्वार्क के बीच में तरंगें है जो इन्हें बाधें रखती है जिन्हें पूर्वजों ने रश्मियां या क्षंदों से संबोधीत किया, जिन्हे बोलचाल की भाषा में देवियां भी कहा जाता है।
और जो क्वार्क है जो प्रोटान और न्युट्रान उन्हें देव कहा गया है, इनका भोजन उर्जा है।
🔆हमारे लिये भोजन मात्र 4 प्रतिशत ही आहार है, आहार के रूप में 550 किलो वायु भी हमारा आहार है। और जो हम बालने, देखने, सुनने इत्यादि के रूप में जो हम खर्च कर रहे है वह उर्जा है।
⛔️प्रोटान : महेष, शंकर, कंकर ।
⛔️न्युट्रान : विष्णु- जो आकार दे रहा है।
⛔️इलैक्ट्रान : ब्रह्मा- जो बांध रहा है।
✍️ ….पंकज
(आलोक सेमवाल )







